September 15, 2026

भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 62,500 प्रतिष्ठानों पर फैसले का इंतजार

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भोपाल । शहर के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई। जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण अब इस मामले की सुनवाई बाद में होगी। फिलहाल नई तारीख तय नहीं हुई है।

इस सुनवाई में भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में चल रहे करीब 62,500 प्रतिष्ठानों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला आने की उम्मीद थी। इसी मामले में मंगलवार, 15 सितंबर को सुनवाई तय थी। नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करनी थी। अब सुनवाई टलने के बाद अगली तारीख का इंतजार है।

इस मामले में भोपाल नगर निगम अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुका है। वहीं, रहवासी पक्ष ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने दस्तावेज कोर्ट में पेश किए हैं।

याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का आरोप है कि निगम ने कार्रवाई को लेकर जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें कई बातें सही नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, उनमें से कई दोबारा खुल गए हैं। रहवासी पक्ष ने निगम की कार्रवाई को लेकर कोर्ट के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

दरअसल, 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। करीब 15 दिनों तक नोटिस देने का अभियान चला।

इस दौरान सूची में शामिल करीब 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद निगम ने 3 दिनों तक कार्रवाई करते हुए करीब 190 प्रतिष्ठानों को बंद किया था। हालांकि, व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रोक दी गई।

निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर उतर आए थे। व्यापारियों के विरोध के बाद निगम ने कार्रवाई रोक दी। पिछले करीब 15 दिनों से इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। दूसरी ओर, रहवासी निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय लोगों को लगातार परेशानी हो रही है।

भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को दिए गए राहत और स्टे ऑर्डर भी निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

रहवासियों की मांग है कि आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां बंद की जाएं। दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाले शोर और भीड़ को रोका जाए। बढ़ते ट्रैफिक और व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली सार्वजनिक परेशानी को कम किया जाए। रहवासी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा का भी ध्यान रखने की मांग की गई है। साथ ही नियमों के खिलाफ चल रहे प्रतिष्ठानों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग है।

अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। नई तारीख तय होने के बाद 62,500 प्रतिष्ठानों और भोपाल के रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।

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