March 9, 2026

बस हादसों पर RTO की सख्ती: जबलपुर में बस बॉडी मेकिंग कारखानों पर ताबड़तोड़ छापे. एक यूनिट सील

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जबलपुर । हाल के दिनों में यात्री बसों में आग लगने की घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इन हादसों में कई मासूम लोगों की जान जा चुकी है और कई परिवार उजड़ गए हैं। इन घटनाओं से सबक लेते हुए अब जबलपुर का परिवहन विभाग पूरी तरह सख्ती के मूड में नजर आ रहा है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आरटीओ ने बस बॉडी मेकिंग कारखानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में आरटीओ संतोष पॉल के नेतृत्व में परिवहन विभाग की टीम ने महानद्दा क्षेत्र स्थित ‘दिक्षु बस बॉडी मेकिंग’ कारखाने पर अचानक छापा मारा। जांच के दौरान कारखाने में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
सबसे अहम बात यह रही कि यूनिट के पास अनिवार्य सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी. जो बस बॉडी निर्माण के लिए जरूरी मानी जाती है। इसके अलावा मौके पर सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी देखी गई।जांच में यह भी पाया गया कि कारखाने में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और निर्माण प्रक्रिया में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। इन गंभीर खामियों को देखते हुए परिवहन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बस बॉडी मेकिंग यूनिट को सील कर दिया। आरटीओ की इस सख्त कार्रवाई से बस बॉडी निर्माताओं में हड़कंप मच गया है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कई बस बॉडी सेंटर्स ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तय मापदंडों की अनदेखी कर रहे हैं। यही लापरवाही आगे चलकर बड़े हादसों की वजह बन रही है। नियमों के उल्लंघन के तहत घटिया क्वालिटी की वायरिंग. ज्वलनशील मटेरियल का उपयोग. इमरजेंसी गेट की कमी और फायर सेफ्टी मानकों में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है।सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ कारखाने बिना ARAI सर्टिफिकेशन के ही बस बॉडी का निर्माण कर रहे हैं. जो सीधे तौर पर यात्रियों की जान को खतरे में डालता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बसों में लगने वाली आग की बड़ी वजह शॉर्ट सर्किट और खराब वायरिंग होती है. जिसकी जड़ इन्हीं अवैध और लापरवाह निर्माण प्रक्रियाओं में छिपी है।

परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आरटीओ का कहना है कि जो भी बस बॉडी निर्माता नियमों का पालन नहीं करेगा. उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. चाहे वह सीलिंग हो या कानूनी कार्रवाई। आने वाले दिनों में जबलपुर के अन्य बस बॉडी मेकिंग सेंटर्स पर भी इसी तरह की जांच और छापेमारी की जाएगी। विभाग की इस सख्ती से यह उम्मीद की जा रही है कि बस निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होगा और भविष्य में बसों में होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं पर प्रभावी रूप से रोक लग सकेगी। यात्रियों की जान बचाने के लिए उठाया गया यह कदम परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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