दतिया उपचुनाव से पहले बदले सियासी संके कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की सूची से अवधेश नायक बाहर, भाजपा में वापसी की चर्चाओं ने पकड़ा जोर
कांग्रेस ने उपचुनाव के मद्देनजर अपने प्रमुख नेताओं को शामिल करते हुए स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है। सूची में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई वरिष्ठ नेताओं को स्थान दिया गया, लेकिन दतिया की राजनीति में प्रभाव रखने वाले अवधेश नायक का नाम शामिल नहीं किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में किसी वरिष्ठ नेता का सूची से बाहर रहना स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े करता है और इससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है।
हाल ही में आयोजित कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण जनसभा में भी अवधेश नायक की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। वे न तो मंच पर दिखाई दिए और न ही चुनावी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आए। लगातार सामने आ रहे ऐसे संकेतों ने यह चर्चा और मजबूत कर दी है कि पार्टी के भीतर उनकी भूमिका पहले जैसी सक्रिय नहीं रह गई है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
अवधेश नायक ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। उस समय उनके भाजपा नेतृत्व, विशेषकर तत्कालीन गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के साथ मतभेदों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में व्यापक रूप से हुई थी। कांग्रेस ने शुरुआती दौर में उन्हें दतिया से विधानसभा चुनाव का उम्मीदवार भी घोषित किया था, लेकिन बाद में पार्टी ने अपना निर्णय बदलते हुए उनका टिकट वापस ले लिया और राजेंद्र भारती को उम्मीदवार बनाया। चुनाव परिणाम में राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की, जिसके बाद भी अवधेश नायक की संगठनात्मक भूमिका को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे।
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में एक बार फिर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि अवधेश नायक भविष्य में कोई बड़ा राजनीतिक निर्णय ले सकते हैं। प्रदेश की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों और भाजपा के भीतर बदलते समीकरणों को देखते हुए उनकी संभावित वापसी को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक न तो भाजपा और न ही कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं बल्कि क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा भी माना जा रहा है। ऐसे में प्रभावशाली नेताओं की सक्रियता या निष्क्रियता चुनावी रणनीति पर असर डाल सकती है। अवधेश नायक का आगामी रुख दोनों प्रमुख दलों के लिए राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल पूरे मामले में स्थिति अटकलों के स्तर पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यदि अवधेश नायक स्वयं अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई घोषणा करते हैं या किसी दल की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तो दतिया ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
