March 10, 2026

MP के पुलिस ट्रेनिंग केंद्रों में अब ‘दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ से होगी दिन की शुरुआत, विपक्ष ने उठाए सवाल

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भोपाल।
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों (Police Training Centres) में अब दिन की शुरुआत ‘श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ के पाठ से होगी। पुलिस प्रशिक्षण विंग के इस नए निर्देश के बाद राज्य में एक बार फिर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इसे सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ बीजेपी (BJP) ने इसे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बताते हुए इसका बचाव किया है।

दरअसल, पुलिस प्रशिक्षण विंग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (PTS) को निर्देश जारी किया है कि हर दिन प्रशिक्षण शुरू होने से पहले परिसर में लगे लाउडस्पीकरों के जरिए ‘श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ बजाया जाए, ताकि प्रशिक्षक और भर्ती दोनों इसे सुन सकें।


एडीजी ने बताई वजह

एडीजी ने कहा कि दक्षिणामूर्ति को ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है। उनके मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे विवेक, संवेदनशीलता और सहानुभूति भी होनी चाहिए। उनका मानना है कि स्तोत्र के माध्यम से प्रशिक्षुओं में नैतिक स्पष्टता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।


पहले भी हो चुका है ऐसा निर्देश

दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब पुलिस प्रशिक्षण में धार्मिक या दार्शनिक ग्रंथों को शामिल किया गया हो। पिछले साल भी विभाग ने आठ पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में रात के ध्यान सत्र से पहले भागवद गीता का एक अध्याय पढ़ने का सुझाव दिया था। इससे पहले प्रशिक्षुओं को रामचरितमानस के दोहे पढ़ने के लिए भी कहा गया था। अधिकारियों का कहना था कि इससे लगभग 4000 प्रशिक्षुओं में अनुशासन और नैतिक सोच को बढ़ावा मिलेगा।


कांग्रेस ने उठाए सवाल

नए आदेश के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि कानून व्यवस्था संभालने वाली संस्थाओं को पूरी तरह तटस्थ होना चाहिए और किसी एक आस्था से जुड़ी परंपरा को बढ़ावा देना ठीक नहीं है।


बीजेपी का पलटवार

भाजपा ने इस पहल का बचाव किया है। पार्टी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि गीता या दक्षिणामूर्ति स्तोत्र जैसे ग्रंथ सांप्रदायिक नहीं बल्कि ज्ञान, अनुशासन और कर्तव्य की शिक्षाएं देते हैं। उनके मुताबिक, इन्हें सांप्रदायिक बताना भारत की सभ्यतागत परंपरा को न समझने जैसा है।

पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले से ही योग, ध्यान और मानसिक अनुशासन शामिल हैं और यह पहल उसी का हिस्सा है। उनका दावा है कि इसका उद्देश्य धार्मिक अभ्यास लागू करना नहीं बल्कि नैतिक सोच और संवेदनशीलता को मजबूत करना है। हालांकि, इस निर्देश के बाद एक बार फिर मध्य प्रदेश की पुलिस ट्रेनिंग व्यवस्था सियासी बहस के केंद्र में आ गई है, जहां सांस्कृतिक परंपरा और संस्थागत तटस्थता को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

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