मप्र विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे के बीच पांच विधेयक पारित
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र केवल तीन दिन चला। बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने पांच महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए। देर शाम तक सदन चलने के बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
मप्र विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को सदन के भीतर और बाहर जबरदस्त सियासी ड्रामा देखने को मिला। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई मारपीट और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कांग्रेस विधायक काली पट्टी बांधकर पहुंचे। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा न मिलने से नाराज विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। पांच विधेयक पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन की कार्रवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन में ये पांच बिल पारित
– भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) संशोधन विधेयक
– मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026
– मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक-2026
– मध्य प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक- 2026
– मध्य प्रदेश निरसन विधायक 2026
जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर बहस के दौरान कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 15 साल पुरानी मेडिकल यूनिवर्सिटी को बांटने की कोई जरूरत नहीं है। देश के किसी बड़े राज्य में दो मेडिकल यूनिवर्सिटी नहीं हैं। उज्जैन में पर्याप्त सरकारी जमीन ही नहीं है, वहां मुख्यालय बनाने के लिए निजी जमीनें खरीदनी पड़ेंगी।
किसानों का मुआवजा और जमीन नामांतरण का मुद्दा
कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने मंदसौर जिले में 15 हजार किसानों के 27.47 करोड़ रुपये के लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाया। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने सदन से वॉकआउट किया। आदिवासियों की जमीन पर एक्शन: विधायक हीरालाल अलावा के सवाल पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने भरोसा दिया कि बिना अनुमति गैर-आदिवासियों के नाम की गई जमीनों के नामांतरण निरस्त कर आदिवासियों को कब्जा वापस दिलाया जाएगा।
पंचायत और शिक्षा व्यवस्था पर फैसले
पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने ऐलान किया कि जिन गांवों में पंचायत या सामुदायिक भवन नहीं हैं, वहां पहली प्राथमिकता पर निर्माण कराया जाएगा। भर्ती और पेपर लीक: उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में पेपर लीक की शिकायत नहीं है और समय पर रिजल्ट के लिए डिजिटल वैल्यूएशन शुरू किया जा रहा है।
अनुपूरक बजट पर उमंग सिंघार बोले- एमपी डूबा, पैसा गुजरात को मिला
अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि नर्मदा के पानी और बिजली पर मध्य प्रदेश का अधिकार था। सबसे अधिक इलाका भी मध्य प्रदेश का ही डूब क्षेत्र में आया, लेकिन प्रदेश को लाभ मिलने के बजाय केंद्र सरकार ने गुजरात को आर्थिक मदद दिला दी। सिंघार ने जल जीवन मिशन में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने कभी इसकी गंभीर समीक्षा नहीं की कि आखिर प्रदेश के लोगों तक योजना का पानी क्यों नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार को जवाब देना चाहिए कि योजना का लाभ आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंच सका।
नेता प्रतिपक्ष ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देशभर में करीब डेढ़ लाख अभ्यर्थी लंबे समय से परेशान हैं। भर्ती से जुड़े नियम वर्षों से लंबित हैं, लेकिन सरकार ने आज तक इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने सरकार से लंबित मामलों का जल्द समाधान करने की मांग की।
विधानसभा में छात्रों को ‘कीड़ा’ कहे जाने के आरोपों पर विजयवर्गीय का खंडन
विधानसभा में छात्रों को ‘कीड़ा’ कहे जाने के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सफाई देते हुए इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने छात्रों के लिए ऐसे किसी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और न ही उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा था। उन्होंने कहा कि विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
