कांग्रेस में प्रवक्ता पदों पर पैसे का खेल? बीजेपी ने जारी की कथित रेट लिस्ट, मचा सियासी बवाल..
राकेश सिंह यादव के अनुसार, कांग्रेस ने फरवरी 2026 में नए प्रवक्ताओं के चयन के लिए टैलेंट हंट कार्यक्रम आयोजित किया था। इसके बाद मार्च में प्रदेश और संभाग स्तर पर उम्मीदवारों के इंटरव्यू भी कराए गए थे। हालांकि, इस प्रक्रिया के लगभग नौ महीने बीतने के बावजूद नियुक्तियों की घोषणा नहीं हुई है। बीजेपी प्रवक्ता का आरोप है कि अब दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के नाम पर प्रवक्ता पद हासिल करने के इच्छुक लोगों से रकम जुटाई जा रही है।
यादव ने दावा किया कि कांग्रेस में प्रदेश से लेकर शहर स्तर तक प्रवक्ता बनने के लिए कथित तौर पर अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है। उनके द्वारा बताई गई सूची के मुताबिक, प्रदेश प्रवक्ता के पद के लिए दो लाख रुपये, संभागीय प्रवक्ता के लिए डेढ़ लाख रुपये, जिला प्रवक्ता के लिए एक लाख रुपये और शहर प्रवक्ता के पद के लिए 50 हजार रुपये मांगे जाने का आरोप है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस के मीडिया प्रभारी मुकेश नायक को भी निशाने पर लिया। उनका आरोप है कि टैलेंट हंट के जरिए प्रतिभाशाली लोगों के चयन की बात कही गई थी, लेकिन अब नियुक्तियों के नाम पर कथित वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने दावा किया कि इस काम के लिए कुछ लोगों को जिम्मेदारी दी गई है, जो इच्छुक उम्मीदवारों से संपर्क कर रहे हैं।
यादव ने इंदौर में भी कथित तौर पर दो कलेक्शन एजेंट सक्रिय होने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, इनमें एक बिल्डर और दूसरा मुखरंजन की दुकान संचालित करने वाला व्यक्ति शामिल है। हालांकि, इन व्यक्तियों की भूमिका या कथित लेनदेन के समर्थन में कोई सार्वजनिक दस्तावेज अथवा स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं रखा गया है।
इस विवाद में टीवी डिबेट में कांग्रेस की ओर से शामिल होने का अवसर दिलाने के नाम पर पैसे लेने का आरोप भी लगाया गया है। यादव ने एक पूर्व मंत्री के हवाले से दावा किया कि पीसीसी में मुकेश नायक की जगह एक अन्य व्यक्ति को बैठाया गया है, जिसे उन्होंने मयंक नायक बताया। आरोप है कि यह व्यक्ति टीवी डिबेट में कांग्रेस का पक्ष रखने के लिए नाम भेजने के बदले प्रति डिबेट दो हजार रुपये ले रहा है। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और हरीश चौधरी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संगठन सृजन और प्रवक्ताओं के चयन की प्रक्रिया में पहले भी अनियमितताएं हुई थीं। अब नई नियुक्तियों के नाम पर कथित पैसे की मांग का मामला सामने आ रहा है। उन्होंने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व और राहुल गांधी से भी सवाल किया कि जब चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और मार्च में इंटरव्यू आयोजित किए गए थे, तो अब तक नियुक्तियां क्यों लंबित हैं।
यादव ने कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रवक्ताओं का चयन योग्यता के आधार पर होगा या कथित आर्थिक लेनदेन के जरिए पद दिए जाएंगे।
फिलहाल इन आरोपों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कथित रेट लिस्ट, कलेक्शन एजेंटों और टीवी डिबेट के नाम पर पैसे लेने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित कांग्रेस नेताओं का पक्ष भी सामने आना बाकी है। अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व इन गंभीर आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और लंबित प्रवक्ता नियुक्तियों को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट करता है।
