March 11, 2026

मऊगंज में खाकी का गवाह घोटाला: पुलिस के 'सुपर गवाह' ने खोला तंत्र का कच्चा चिट्ठा, 1000 मुकदमे और सिर्फ 6 चेहरे

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मऊगंज । मऊगंज अभय मिश्रा मऊगंज जिले के नईगढ़ी और लौर थाने में पुलिस द्वारा गवाहों के नाम पर एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है जो ना सिर्फ कानून की धज्जियां उड़ाने वाला है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। यहां पर ऐसे सुपर गवाह सामने आए हैं, जो एक ही दिन में 7-7 मुकदमों में गवाही देते हैं और हर मामले में वही चेहरा दिखाई देता है। इन गवाहों में प्रमुख नाम है अमित कुशवाहा का जो अब तक 500 से ज्यादा मामलों में गवाही दे चुका है।

गवाहों के नाम पर खेल

अमित कुशवाहा, जो खुद एक सरकारी वाहन चालक है, मऊगंज पुलिस के पॉकेट गवाह के रूप में सामने आया है। आश्चर्यजनक रूप से, 2020 की एक FIR में उसकी उम्र 20 साल दर्ज की जाती है, जबकि 5 साल बाद 2025 की FIR में उसकी उम्र केवल 21 साल बताई जाती है। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या मऊगंज पुलिस ने जानबूझकर यह गवाह तैयार किया है। RTI के जवाब में पुलिस ने दावा किया था कि अमित कुशवाहा उनका वाहन चालक नहीं है, लेकिन जब उसे सरकारी गाड़ी चलाते पकड़ा गया तो यह सफाई पूरी तरह से झूठी साबित हो गई। इसके अलावा यह भी तथ्य सामने आया है कि अमित कुशवाहा थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर के साथ हमेशा रहता है और जहां-जहां साहब का तबादला होता है वह गवाही देने पहुंच जाता है।

पुलिसिया तंत्र की पोल
टीम ने यह भी खुलासा किया कि गवाही देने वाले इसी पॉकेट गवाह के जरिए पुलिस ने दर्जनों निर्दोषों को सलाखों के पीछे डाला। उदाहरण के तौर पर जहरीली शराब मामले में 20 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई जिसमें अमित कुशवाहा गवाह बना। यह मामला सिर्फ एक उदाहरण था क्योंकि ऐसे कई मामलों में गवाह वही चेहरा नजर आता है जिससे पुलिस ने तंत्र को पूरी तरह से मजाक बना दिया। नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर का नाम इस पूरे खेल में सबसे ऊपर है, क्योंकि उनके कार्यकाल में गवाहों के इस सिंडिकेट का पूरी तरह से विस्तार हुआ। इनका ट्रैक रिकॉर्ड विवादों से भरा पड़ा है जिसमें बिछिया थाने में एक निर्दोष व्यक्ति की पिटाई के मामले में मानवाधिकार आयोग ने जुर्माना लगाया था लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

किसकी हो रही है सुनवाई

मऊगंज के इस मामले में आरोप है कि पुलिस ने 80 साल के बुजुर्ग नंदकुमार तिवारी को आधी रात को लॉकअप में डाल दिया। उनके खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं था बस उन्होंने पुलिस की रात में मौजूदगी पर सवाल उठाया था। वायरल ऑडियो में पुलिसकर्मी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उनके पास शराब नहीं बल्कि पेट्रोल था फिर भी आरोप आबकारी का बनाया गया और गवाह वही पुलिस का चहेता अमित कुशवाहा।

सिंडीकेट का बड़ा खुलासा

नईगढ़ी और लौर थाने में पॉकेट गवाहों की पूरी फौज खड़ी कर दी गई है, जिनमें राहुल विश्वकर्मा, दिनेश कुशवाहा जैसे नाम शामिल हैं, जो थाने में चपरासी तक के काम करते हैं। यह मामला अब राज्य की सियासत के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। समाजसेवी कुंजबिहारी तिवारी ने इस संगठित अपराध की शिकायत मुख्यमंत्री, डीजीपी, आईजी और लोकायुक्त से की है। उनके पास साक्ष्य और वीडियो प्रमाण हैं, जो पुलिस के खिलाफ गवाही दे रहे हैं।

सीसीटीएनएस पोर्टल और मैनुअल जांच
मऊगंज पुलिस का गवाह घोटाला अब सीसीटीएनएस पोर्टल के जरिए सामने आया है, जहां पर दर्ज डिजिटल रिकॉर्ड से इस पूरे तंत्र का खुलासा हुआ है। जानकारों का मानना है कि अगर मैनुअल FIR और पुरानी केस डायरियों की निष्पक्ष जांच की जाए तो यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है, जो मऊगंज के नईगढ़ी और लौर थाना पुलिस के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है।

न्याय के गले में फंसा ताला
क्या खाकी अब बेगुनाहों की जिंदगी से खेल रही है यह सवाल मऊगंज की पुलिस पर ही नहीं पूरे न्यायिक तंत्र पर भी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अमानुल्लाह ने हाल ही में पॉकेट गवाहों पर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे न्याय का कत्ल बताया था लेकिन मऊगंज का यह मामला पूरी तरह से पुलिसिया तंत्र की पोल खोलने का काम कर रहा है। अब सवाल यह है कि इस घोटाले पर कब कार्रवाई होगी ।

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