उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन
भस्म आरती की शुरुआत प्रथम घंटानाद के साथ हुई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया। इसके पश्चात कपूर आरती संपन्न हुई और भगवान के मस्तक पर भांग चंदन तथा त्रिपुंड का तिलक लगाया गया। जटाधारी बाबा महाकाल का श्रृंगार अत्यंत आकर्षक और भव्य स्वरूप में किया गया जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को परंपरा के अनुसार वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से संपन्न इस विशेष अनुष्ठान का सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और उन पर विशेष कृपा बरसाते हैं।
भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग का मुकुट रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और आकर्षक आभूषणों से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाओं से भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर विश्व कल्याण और सुख समृद्धि की कामना की गई।
भस्म आरती के दौरान देश और विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा दिखाई दिया। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में मंगल की कामना की।
महाकाल मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन आस्था की जीवंत परंपरा है। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली यह आरती भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की महिमा का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि इस दिव्य आरती के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
