August 20, 2026

महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश पर फिर विवाद, डिजिटल क्रिएटर की तस्वीरों से उठा VIP कल्चर का मुद्दा; सांसद फिरोजिया ने जताई नाराजगी

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मध्यप्रदेश ।उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर गर्भगृह प्रवेश को लेकर विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों ने मंदिर प्रशासन की व्यवस्था और आम श्रद्धालुओं के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है। तस्वीरों में दिल्ली निवासी डिजिटल क्रिएटर अक्षय आनंद अपनी पत्नी और मित्रों के साथ महाकाल मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने वीआईपी संस्कृति और दोहरे मापदंडों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार यह तस्वीरें 15 जून की बताई जा रही हैं। उस दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इसी दौरान अक्षय आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गर्भगृह में दर्शन करते हुए तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों में वे पारंपरिक धोती-सोला पहनकर गर्भगृह में मौजूद नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, गर्भगृह परिसर में फोटो भी खिंचवाई गईं, जबकि मंदिर परिसर में फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लागू है।

तस्वीरें वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब आम भक्तों को वर्षों से गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है, तो कुछ चुनिंदा लोगों को विशेष सुविधा कैसे दी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे वीआईपी कल्चर का उदाहरण बताया।

विवाद बढ़ने के बाद महाकाल मंदिर प्रशासन की ओर से सफाई भी सामने आई। मंदिर प्रशासक ने बताया कि अक्षय आनंद और उनके साथ मौजूद अन्य लोग हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के साथ मंदिर पहुंचे थे। इसी वजह से उन्हें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। हालांकि इस स्पष्टीकरण के बाद भी लोगों की नाराजगी कम होती दिखाई नहीं दे रही है।

मामले में उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने भी खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर में वीआईपी संस्कृति का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है और वे इसके घोर विरोधी हैं। सांसद ने कहा कि वे स्वयं आज भी सामान्य श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी माताजी पिछले कई दशकों से नियमित रूप से महाकाल मंदिर जाती हैं और कभी किसी विशेष सुविधा का लाभ नहीं लेतीं।

सांसद फिरोजिया ने कहा कि भगवान के दरबार में सभी समान हैं। यहां किसी राजा और रंक में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को भी चेताते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि अंततः सभी को भगवान महाकाल की शरण में ही जाना है।

उन्होंने मांग की कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे के लिए महाकाल मंदिर का गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए, ताकि भक्त स्वयं जलाभिषेक और पूजन कर सकें। उन्होंने बताया कि इस विषय पर वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा कर चुके हैं।

गौरतलब है कि महाकाल मंदिर का गर्भगृह जुलाई 2023 में श्रावण मास के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए आम श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया था। उस समय इसे अस्थायी व्यवस्था बताया गया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खोला गया। अब वायरल तस्वीरों ने एक बार फिर मंदिर में वीआईपी व्यवस्था और श्रद्धालुओं के अधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

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