March 8, 2026

16 से 24 जनवरी भोपाल में महाभारत समागम: शांति और संवाद का वैश्विक संदेश

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भोपाल । भोपाल का भारत भवन 16 से 24 जनवरी तक एक ऐतिहासिक महाभारत समागम का आयोजन करने जा रहा है जो न केवल भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों से जुड़ा होगा बल्कि शांति और संवाद का संदेश भी देगा। यह आयोजन वैश्विक स्तर पर बढ़ती हिंसा और युद्ध की समस्याओं के बीच एक महत्वपूर्ण पहल है जहां विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित रंग समूह एकत्र होंगे। इस नौ दिवसीय महोत्सव में भारत के साथ-साथ इंडोनेशिया श्रीलंका और जापान जैसे देशों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।

इस महाभारत समागम के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में नाटक नृत्य-नाट्य कठपुतली कार्यशालाएं लोक और शास्त्रीय प्रस्तुतियां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और इमर्सिव डोम थिएटर जैसे विविध रूपों में महाभारत के संदेशों को प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्य उद्देश्य होगा युद्ध के विरुद्ध शांति और संवाद का प्रबल संदेश देना। वीर भारत न्यास के आयोजन में देश और विदेश से कलाकार शांति के प्रयासों को सांस्कृतिक रूप में प्रस्तुत करेंगे।

वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी के अनुसार यह आयोजन वैश्विक संघर्षों और सभ्यताओं के टकराव के वर्तमान दौर में एक मंच प्रदान करेगा जहां शांति और संवाद के जरिए एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। भारत भवन को इस आयोजन के लिए एक आदर्श स्थल माना गया है क्योंकि यहां से शांति का संदेश दुनिया तक पहुंचाने की विशेष क्षमता है।

महाभारत जिसे आम तौर पर एक युद्ध कथा के रूप में जाना जाता है इस आयोजन के जरिए केवल युद्ध की कथा नहीं बल्कि मानवता विवेक और करुणा की महागाथा के रूप में प्रस्तुत की जाएगी। श्री कृष्ण के संवाद आधारित प्रयासों को आज के समय की वैश्विक परिस्थितियों में प्रासंगिक माना गया है। यह आयोजन दर्शकों को यह समझाएगा कि युद्ध कभी समाधान नहीं हो सकता और संवाद और समझौते से ही समस्याओं का समाधान संभव है।

आयोजन में महाभारत के महत्वपूर्ण पहलुओं को जीवन्त रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। नेपथ्य कला अस्त्र-शस्त्र चक्रव्यूह और पताकाओं की प्रदर्शनी महाभारत के दृश्य संसार को दर्शकों तक पहुंचाएगी। इसके अलावा महाभारत पर आधारित चित्र प्रदर्शनी और भारतीय कठपुतली कला भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी जो भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करेंगी।

इस समागम में सभ्यताओं की सांस और भूली बिसरी सभ्यताएं जैसी पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा जो सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगे। यह आयोजन न केवल भारतीय दर्शकों के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर होगा ताकि वे भारतीय महाकाव्य महाभारत के गहरे संदेशों को समझ सकें और शांति की दिशा में योगदान दे सकें।

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