सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में
राज्यसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब विपक्ष ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सभापति की ओर से अनुमति नहीं मिलने पर विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में लोकतंत्र की मर्यादा को तार तार किया जा रहा है और विपक्ष केवल अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और ऐसे व्यवहार को कभी स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा और सदन में नारेबाजी होती रही।
इधर दिल्ली में भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या पार्टी उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटने के बाद फिलहाल वे सांसद के रूप में सक्रिय हैं लेकिन अमित शाह से मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग अलग अर्थ निकाल रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
राजनीति के साथ साथ प्रशासनिक व्यवस्था की एक तस्वीर अनूपपुर जिले से सामने आई जिसने सभी का ध्यान खींचा। पुष्पराजगढ़ के गन्नागोडा स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक नर्स ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए पेड़ पर चढ़ गई। स्वास्थ्य केंद्र में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उसे मजबूरी में यह तरीका अपनाना पड़ा। वायरल वीडियो में नर्स यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि जब तक ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं लग जाएगी तब तक वह नीचे नहीं उतरेगी। यह घटना ग्रामीण इलाकों में डिजिटल व्यवस्था और नेटवर्क की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े करती है।
उधर दतिया उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। मतदान संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक दल अपने अपने दावे कर रहे हैं। इसी बीच यह चर्चा भी सामने आई कि मतदान से पहले एक होटल में हुई रणनीतिक बैठक में विरोधी दल के साथ कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन्हें राजनीतिक तौर पर दूसरे खेमे के करीबी माना जाता है। बताया जा रहा है कि बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए होटल के सीसीटीवी कैमरे तक बंद करा दिए गए थे। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन चुनावी नतीजों से पहले इस तरह की चर्चाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।
संसद की तल्ख बहस हो या संगठन की गतिविधियां अथवा सरकारी व्यवस्था की चुनौतियां मध्य प्रदेश से जुड़ी ये घटनाएं फिलहाल राजनीति और प्रशासन दोनों की दिशा पर सवाल भी खड़े कर रही हैं और चर्चा भी बटोर रही हैं। अब सबकी नजर आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों पर टिकी हुई है।
