July 22, 2026

निजी कॉलेजों की फीस निर्धारण पर घिरी सरकार चार साल में 5062 संस्थानों का शुल्क तय करने की प्रक्रिया पर सवाल

0
untitled-1784708834

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब का हवाला देते हुए फीस निर्धारण में पारदर्शिता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति ने वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच 5062 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय की, जबकि वर्ष 2025-26 में एक ही बैठक के दौरान 355 निजी संस्थानों की फीस निर्धारित कर दी गई। उन्होंने इसे नियमों और व्यावहारिक प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति निर्धारित प्रक्रिया के तहत निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय करती है। उन्होंने जानकारी दी कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अधिकतम 15 दिनों के भीतर संस्थानों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट समिति को सौंपता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर शुल्क निर्धारण किया जाता है।

सरकार के जवाब के बाद कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने दावा किया कि उनके मूल प्रश्न का महत्वपूर्ण हिस्सा अनुत्तरित छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कितने दिनों में कितने संस्थानों के आवेदन और वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण किया। उनके अनुसार वर्ष 2008 के राजपत्र में स्पष्ट प्रावधान हैं कि किसी भी शिक्षण संस्थान की फीस तय करने से पहले उसके आय-व्यय, बैलेंस शीट, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर संस्थान से अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण भी लिया जाता है। ऐसे में एक ही दिन में बड़ी संख्या में संस्थानों की फीस तय होना कई सवाल खड़े करता है।

उपाध्याय ने विशेष रूप से वर्ष 2025-26 का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही बैठक में 355 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारित कर दी गई। उनका कहना है कि प्रत्येक संस्थान के दस्तावेजों, निरीक्षण दल की रिपोर्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट का अलग-अलग परीक्षण किए बिना इतनी बड़ी संख्या में शुल्क निर्धारण करना संभव नहीं लगता। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।

विधायक ने नर्सिंग कॉलेजों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि हर वर्ष 60 से 100 नर्सिंग संस्थानों की फीस तय की जाती है, जबकि कई संस्थानों पर पहले से नियमों के उल्लंघन और अनियमित संचालन के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे संस्थानों के मामलों में निरीक्षण दल और चार्टर्ड अकाउंटेंट ने किन मानकों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की और शुल्क निर्धारण की अनुमति कैसे दी गई।

कांग्रेस विधायक ने मांग की कि निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया की सीबीआई अथवा किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच समिति से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफाखोरी पर रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरे प्रदेश में समान पाठ्यक्रमों के लिए पारदर्शी और एक समान शुल्क व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

यह मुद्दा विधानसभा में सामने आने के बाद निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया, नियामक समिति की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन आरोपों पर क्या आगे की कार्रवाई करती है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *