March 8, 2026

मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना में बड़ा ड्रॉप आउट, केवल 20% बेटियां ही बन पाएंगी लखपति

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भोपाल । मध्य प्रदेश में बेटियों के सशक्तिकरण और लिंगानुपात सुधारने के उद्देश्य से वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना अब गंभीर समीक्षा के दौर में है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि योजना में शामिल बेटियों का सफर आधे रास्ते में ही रुक जाता है।

कक्षा 5वीं उत्तीर्ण करने के बाद लगभग 52% बेटियां पढ़ाई छोड़ देती हैं। कक्षा 6वीं में छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली कुल 13 67 897 बालिकाओं में से कक्षा 9वीं तक पहुंचने पर संख्या घटकर 7 06 123 रह जाती है। यानी करीब 48% बेटियां मध्य विद्यालय में ही सिस्टम से बाहर हो जाती हैं। यह गिरावट हायर सेकेंडरी में और तेज हो जाती है। कक्षा 11वीं में केवल 2 72 443 और 12वीं में 1 56 378 बेटियां ही छात्रवृत्ति की पात्र बचती हैं।

स्नातक स्तर तक पहुंचने वाली बेटियों की संख्या और भी कम है। कुल पंजीकृत लाड़लियों में से केवल 22 022 छात्राएं कॉलेज तक पहुंच पाई हैं और यही वो संख्या है जिन्हें योजना के तहत निर्धारित 1 लाख 43 हजार रुपए की पूरी राशि मिलने की संभावना है। यानी लगभग 80% बेटियां लखपति बनने की दौड़ में पीछे रह जाती हैं।

पढ़ाई छोड़ने का मुख्य कारण योजना की पात्रता नियमों में बताया गया है। विभाग के अनुसार केवल वही बालिकाएं छात्रवृत्ति की पात्र होती हैं जो कक्षा 5वीं पास कर कक्षा 6वीं में प्रवेश लेती हैं और अन्य सभी शर्तें पूरी करती हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार दिसंबर 2025 तक योजना के तहत कुल 813.20 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा उन लाड़लियों का डेटा भी विभाग एकत्रित कर रहा है जिन्हें पंजीकरण के बावजूद छात्रवृत्ति नहीं मिली।

योजना के तहत आर्थिक सहायता इस प्रकार दी जाती है: कक्षा 6वीं में प्रवेश पर 2 000 रुपए कक्षा 9वीं में 4 000 रुपए कक्षा 11वीं में 6 000 रुपए कक्षा 12वीं में 6 000 रुपए और ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन/व्यावसायिक पाठ्यक्रम में प्रवेश पर 25 000 रुपए। इसके अलावा बालिका की उम्र 21 वर्ष पूरी होने 12वीं उत्तीर्ण करने और निर्धारित आयु में विवाह होने पर 1 लाख रुपए की अंतिम किश्त सरकार द्वारा दी जाती है।

योजना के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शुरुआती उत्साह के बावजूद बेटियों का लखपति बनने का सपना आधे रास्ते में ही टूट रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि dropout रोकने के लिए स्कूल स्तर पर निरंतर निगरानी परिवारों को जागरूक करना और समय पर छात्रवृत्ति वितरण जरूरी है ताकि लाड़लियों का शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके।

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