जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते
जीतू पटवारी ने मंच से दिखाया भ्रष्टाचार का कथित रेट कार्ड
कटनी जिले के बरही में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक कार्यक्रम के दौरान सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोला। हाल ही में एक अधिकारी का वीडियो सामने आया था जिसमें नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार को लेकर बातें कही गई थीं। इसी मुद्दे को उठाते हुए पटवारी मंच पर डस्टबिन फिनाइल की कैन और बल्ब लेकर पहुंचे। उन्होंने इन वस्तुओं की कीमतों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एक बाल्टी की कीमत एक लाख रुपये फिनाइल की बोतल की कीमत 36 हजार रुपये और बल्ब की कीमत 11 हजार रुपये बताई जा रही है। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि इन कीमतों और आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।
पटवारी ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी पर रिश्वत लेने के मामले को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इसी दौरान बरही में उनकी बाइक रैली भी चर्चा में रही। पटवारी खुद बुलेट चलाते नजर आए लेकिन उनके सिर पर हेलमेट नहीं था। रैली में दूसरे कार्यकर्ताओं के भी बिना हेलमेट होने की बात सामने आई। इस घटना को लेकर यातायात नियमों के पालन पर सवाल उठे।
दिग्विजय सिंह की यात्रा में राम भजन के साथ सियासी नारे
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दशहरे पर उज्जैन से राम नाम के साथ सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा लेकर निकले थे। यह यात्रा अयोध्या तक जाने वाली है। शाजापुर पहुंचने पर दिग्विजय सिंह एक राम भजन पर थिरकते नजर आए। लेकिन यात्रा के दौरान राजनीतिक नारे भी सुनाई दिए। रिपोर्ट के मुताबिक वहां भाजपा के खिलाफ चंदा चोरी और वोट चोरी से जुड़े नारे लगाए गए। दिग्विजय सिंह ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली के लिए लोगों को आमंत्रित भी किया। इससे यात्रा के गैरराजनीतिक होने के दावे और उसके दौरान दिखे राजनीतिक संदेशों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते
दतिया के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने एक कार्यकर्ता को जूते पहनाने के कारण चर्चा में आए। बताया गया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ता के बूथ पर भाजपा को हार मिली थी। इसके बाद उसने प्रण लिया था कि जब तक वह अपने बूथ पर पार्टी को जीत नहीं दिलाएगा तब तक जूते चप्पल नहीं पहनेगा। हालिया उपचुनाव में उसके बूथ पर भाजपा को अधिक वोट मिलने के बाद जूते पहनने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा ने खुद कार्यकर्ता को जूते पहनाए और उसके लेस बांधे। यह दृश्य पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नेताओं के जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
सीएम मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के अलग अंदाज
बड़वानी जिले के सेंधवा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मलखंब का प्रदर्शन देखा और प्रभावित होकर एक बच्चे को अपने कंधे पर बैठा लिया। एक कार्यक्रम में बारेली बोली का जिक्र होने पर उन्होंने इसे सीखने की बात कही और अपने पूर्व जन्म में बारेला होने का उल्लेख किया। उनके इस बयान की चर्चा जनसंपर्क के संदर्भ में हुई।
वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र के नीलगढ़ गांव पहुंचे जहां विस्थापन से जुड़े मुद्दों के बीच वे आदिवासी ग्रामीणों के साथ बैठे और भोजन किया। वे ग्रामीणों के साथ नाचते थिरकते भी दिखाई दिए। उन्होंने वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए गांव छोड़ने के फैसले को त्याग और प्रकृति के प्रति प्रेम का उदाहरण बताया।
प्रदेश की इन घटनाओं से साफ है कि राजनीतिक गतिविधियों में भाषणों के साथ नेताओं के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरें भी चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। कहीं आरोपों के जरिए सरकार को घेरा जा रहा है तो कहीं भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश दिखाई दे रही है।
