September 10, 2026

MP हाईकोर्ट में खत्म हुआ तीन महीने का इंतजार, जस्टिस अल्पेश कोगजे बने स्थायी चीफ जस्टिस

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भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को करीब तीन महीने के इंतजार के बाद स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। गुजरात हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने गुरुवार को भोपाल स्थित लोकभवन में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने उन्हें शपथ दिलाई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समेत प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। जस्टिस कोगजे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं।

जस्टिस कोगजे की नियुक्ति के साथ ही अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को स्थायी नेतृत्व मिल गया है। पिछले करीब तीन महीने से जस्टिस विवेक रसिया कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे के नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री निवास पर नए मुख्य न्यायाधीश के सम्मान में लंच का आयोजन किया गया। शुक्रवार से जस्टिस कोगजे हाईकोर्ट में आधिकारिक रूप से अपना पदभार संभालेंगे।

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का लंबा न्यायिक और कानूनी अनुभव रहा है। उनका जन्म 16 जुलाई 1969 को हुआ था। उन्होंने 1990 में केमिस्ट्री से बीएससी की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद 1993 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसी साल उन्होंने गुजरात में वकालत शुरू की। करीब 33 वर्षों के कानूनी सफर में उन्होंने वकील से लेकर गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश और अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक का सफर तय किया है।

जस्टिस कोगजे को आपराधिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने गुजरात सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में पैरवी की। वर्ष 2001 में वे असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर रहे। इसके बाद 2002 से 2007 तक एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर काम किया। वर्ष 2008 में वे सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स डिपार्टमेंट के स्टैंडिंग काउंसल बने। वर्ष 2011 में उन्हें स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और स्पेशल टास्क फोर्स के स्पेशल काउंसल की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान उन्होंने गोधरा दंगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में गुजरात सरकार का पक्ष रखा।

6 अप्रैल 2016 को जस्टिस कोगजे को गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। करीब दो साल बाद 15 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर उन्होंने आपराधिक मामलों के अलावा सर्विस और लेबर विवाद तथा अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। कई मामलों में उनके फैसलों ने खासा ध्यान खींचा।

वर्ष 2024 में पत्नी की हत्या के आरोपी पति को जमानत देने से इनकार करने वाले फैसले में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अदालत ने आरोपी के जांच को गुमराह करने के प्रयासों को गंभीरता से लिया था। वर्ष 2022 के कस्टोडियल डेथ मामले में भी जमानत से इनकार किया गया। इसके अलावा जल निकायों की सुरक्षा और अंधाधुंध लैंड फिलिंग को लेकर भी उनकी पीठ ने सख्त टिप्पणी की थी। औद्योगिक विवादों और वर्कमैन के अधिकारों से जुड़े मामलों में भी उनके कई अहम फैसले सामने आए।

जस्टिस कोगजे 15 जुलाई 2031 को सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्हें करीब चार वर्ष दस महीने का कार्यकाल मिलेगा। अब उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक प्रशासन से जुड़े कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। शपथ ग्रहण समारोह में हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश और बड़ी संख्या में वकील भी मौजूद रहे।

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