March 8, 2026

ग्वालियर में चंद्र ग्रहण: मंदिर बंद, सुबह 6:20 से शाम 6:46 तक सूतक काल, दर्शन और पूजा वर्जित

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ग्वालियर। ग्वालियर में पहला खग्रास चंद्र ग्रहण 2026: मंदिर बंद, दर्शन वर्जित, सूतक काल जारी
ग्वालियर में 3 मार्च 2026 को साल का पहला खग्रास चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:46 बजे समाप्त होगा। ग्रहण के प्रभाव से जुड़े सूतक काल की शुरुआत सुबह 6:20 बजे से हो चुकी है, जिसके दौरान धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा, आरती और मूर्तियों का स्पर्श वर्जित माना गया है। इस अवधि में मंदिरों के पट बंद रहेंगे और श्रद्धालु केवल घर पर या सुरक्षित स्थानों से मंत्र जाप कर सकते हैं।

ग्वालियर के प्रमुख मंदिरों जैसे राम मंदिर फालका बाजार, अचलेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, गुरुद्वारा महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर में सुबह की आरती के बाद पट बंद कर दिए गए। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होगा और लगभग 28 मिनट तक दिखाई देगा। इस दौरान गर्भवती महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और रोगी विशेष सावधानी बरतें और नुकीली या धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान खाना बनाना और भोजन करना वर्जित होता है क्योंकि इस समय भोजन के दूषित होने की संभावना मानी जाती है। लोग पहले से बना भोजन तुलसी के पत्तों के साथ सुरक्षित रखते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में विधिपूर्वक शुद्धिकरण किया जाएगा। गंगाजल से साफ-सफाई के बाद आरती और भोग का आयोजन किया जाएगा। इस समय स्नान, दान और मंत्र जाप करने का विशेष महत्व है।

वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। खग्रास स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है, जिससे वह लालिमा लिए दिखाई देता है। इस समय सूर्य की किरणें पृथ्वी द्वारा रोकी जाती हैं और चंद्रमा के सतह पर केवल पृथ्वी की छाया पड़ती है।

ग्वालियर में इस ग्रहण को लेकर प्रशासन और मंदिर समिति ने भी श्रद्धालुओं को सतर्क किया है। लोगों से कहा गया है कि वे ग्रहण काल में मंदिरों में जाने से बचें और घर पर रहकर सुरक्षित पूजा-अर्चना करें। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण के दौरान संयम और सावधानी बनाए रखने से नकारात्मक प्रभाव कम होता है।

इस प्रकार, ग्वालियर में 12 घंटे तक चलने वाला सूतक काल और खग्रास चंद्र ग्रहण श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है। ग्रहण के बाद शुद्धिकरण, दान, मंत्र जाप और स्नान के माध्यम से पुण्य और सकारात्मक ऊर्जा अर्जित करने की परंपरा है।

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