October 29, 2026

सिंगरौली के बसौड़ा गांव में सड़क का अभाव, बीमार आदिवासी को कुर्सी पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर परिजन

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मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव का मामला सामने आया है। देवसर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जोगियानी के बसौड़ा गांव में रहने वाले 25 आदिवासी परिवारों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। हाल ही में एक ग्रामीण की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों को उन्हें कुर्सी पर बैठाकर सड़क तक ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद गांव में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

जानकारी के मुताबिक, बसौड़ा गांव के निवासी ईश्वर सिंह गोंड की तबीयत रात के समय अचानक बिगड़ गई। उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। ऐसे में परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की थी। गांव में सड़क नहीं होने के कारण सामान्य वाहन से घर तक पहुंचना संभव नहीं था। मजबूरी में परिजनों ने उन्हें कुर्सी पर बैठाया और उठाकर सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने के लिए सड़क की अहमियत को सामने रखा है। सड़क उपलब्ध नहीं होने पर एंबुलेंस और दूसरे वाहनों का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाने में अतिरिक्त समय और मेहनत लगती है। आपातकाल में यह परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि मरीज को जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होता है।

बसौड़ा गांव के ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके लिए विधायक से लेकर जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों तक आवेदन दिए गए हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और पंचायत स्तर पर भी अपनी समस्या पहुंचाने की बात कही है। उनके अनुसार, सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भी भेजे गए, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

गांव के 25 आदिवासी परिवारों के लिए सड़क का अभाव केवल आवागमन की परेशानी नहीं है, बल्कि इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर संबंधित अधिकारी ध्यान देंगे और गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि गांव तक सड़क नहीं होने की समस्या का समाधान कब होगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांग अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है। बीमार व्यक्ति को कुर्सी पर बैठाकर सड़क तक ले जाने की घटना ने उनकी परेशानी को उजागर किया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से लोगों को अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में मदद मिलती है। बसौड़ा में सामने आई स्थिति बताती है कि सड़क निर्माण की मांग स्थानीय लोगों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सड़क निर्माण की स्वीकृति, बजट या काम शुरू होने की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

फिलहाल, बसौड़ा के ग्रामीणों को सड़क बनने का इंतजार है। अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासन उनकी मांग पर कब कार्रवाई करता है और गांव के परिवारों को इस समस्या से राहत मिल पाती है या नहीं।

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