खजराना मंदिर विवाद में नया मोड़: पीड़िता बोलीं- केस वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव
मंगलवार को डॉ. इंद्रा कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचीं और अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मांग की कि उनके पति एवं खजराना मंदिर के पुजारी पुनीत भट्ट के गर्भगृह में प्रवेश और पूजा-अर्चना करने पर जांच पूरी होने तक रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हो और मामले की जांच जारी हो, तब तक उसे मंदिर की महत्वपूर्ण धार्मिक जिम्मेदारियों से दूर रखा जाना चाहिए।
डॉ. इंद्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मामला दर्ज होने के बाद कई प्रभावशाली लोग उनके घर पहुंचे। उनके अनुसार उन्हें यह कहकर समझाने का प्रयास किया गया कि सामने वाला परिवार काफी प्रतिष्ठित और रसूखदार है, इसलिए विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं। उनका कहना है कि न्याय की लड़ाई कठिन जरूर है, लेकिन वह इसे अंत तक लड़ेंगी।
पीड़िता ने यह भी कहा कि उनके लिए केवल एफआईआर दर्ज हो जाना या अदालत में मामला चलना ही न्याय नहीं है। उनके अनुसार वास्तविक न्याय तब होगा जब उन्हें अपने वैवाहिक घर में रहने का अधिकार मिलेगा। उनका आरोप है कि उन्हें बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के घर से बाहर कर दिया गया और अब अपने ही ससुराल में वापस प्रवेश पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
डॉ. इंद्रा ने अपने आवेदन में आंध्र प्रदेश के एक मंदिर से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां एक समान शिकायत के बाद प्रशासन ने संबंधित पुजारियों को सेवा से निलंबित कर दिया था। इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि जांच लंबित रहने तक पुनीत भट्ट को मंदिर की धार्मिक गतिविधियों और गर्भगृह से दूर रखा जाए।
पीड़िता ने मंदिर परिसर में कथित अनियमितताओं और श्रद्धालुओं द्वारा दी गई दक्षिणा के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े कुछ दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।
दूसरी ओर, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल संबंधित प्रकरण न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। इस बीच डॉ. इंद्रा भट्ट का कहना है कि महिलाओं को हर दौर में अपने अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन वह अपने पक्ष को साबित करने और न्याय प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।
खजराना मंदिर से जुड़े इस विवाद पर अब प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और संबंधित पक्षों की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
