CM के इंतजार में थमी भाजपा की पदयात्रा, नेता सीढ़ियों पर करते रहे प्रतीक्षा; बच्चों को थमाए गए पार्टी के झंडे
पदयात्रा की शुरुआत सुभाष नगर चौराहे से हुई थी। यात्रा परदेशीपुरा चौराहे पहुंची तो वहां मंच से नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माइक संभाला और नारेबाजी करवाकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और सांसद शंकर लालवानी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। नेताओं के भाषण पूरे होने के बाद भी मुख्यमंत्री मोहन यादव कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे थे।
इसके बाद मुख्यमंत्री के आने का इंतजार शुरू हो गया। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से ये देश है वीर जवानों का गीत सुनाया और लोगों से आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री से पदयात्रा शुरू करने की अनुमति ले ली गई है। विजयवर्गीय ने आगे बढ़ने की बात भी कही लेकिन मुख्यमंत्री के आने की सूचना मिलने पर कार्यक्रम में मौजूद नेता रुक गए।
मंत्री विजयवर्गीय के आग्रह पर जनप्रतिनिधि मंच से उतरकर सीढ़ियों की ओर बढ़े। हालांकि मुख्यमंत्री के कुछ देर में पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री और अन्य नेता वहीं रुककर उनका इंतजार करने लगे। इस दौरान विजयवर्गीय दोबारा मंच से नारे लगवाते रहे। कुछ समय बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव का काफिला परदेशीपुरा चौराहे पहुंचा। उनके आगमन की घोषणा की गई और फिर मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने हवा में गुब्बारे छोड़े और इसके बाद पदयात्रा में शामिल हो गए।
कार्यक्रम के दौरान एक और घटनाक्रम चर्चा में रहा। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा पाटनीपुरा स्थित मंच की ओर जाने के लिए सड़क की दूसरी लेन में पहुंचे। वहां उन्हें दो युवकों के साथ एक दोपहिया वाहन दिखाई दिया। उन्होंने वाहन रुकवाया और पीछे बैठे युवक को उतारकर खुद बैठ गए। उन्होंने चालक से उन्हें तुरंत मंच तक पहुंचाने को कहा। जैसे ही चालक ने वाहन मोड़ा उसका अगला पहिया फिसल गया। इससे सुमित मिश्रा और चालक दोनों गिरते-गिरते बच गए।
पदयात्रा में स्कूली बच्चों की मौजूदगी ने भी सवाल खड़े किए। कुछ बच्चे हाथों में भाजपा के झंडे और गले में पार्टी के गमछे डालकर पहुंचे थे। ये बच्चे मां कनकेश्वरी देवी स्कूल के बताए गए। जब उनसे पूछा गया कि लोकतंत्र खतरे में क्यों है तो बच्चों ने कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि स्कूल के शिक्षक उन्हें कार्यक्रम में लेकर आए थे और पहले से यह नहीं बताया गया था कि उन्हें किस उद्देश्य से यहां लाया जा रहा है।
इस पदयात्रा को लेकर शहर में यातायात व्यवस्था पर भी सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक करीब डेढ़ किलोमीटर की यात्रा के लिए लगभग 50 रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी। सुबह आठ बजे से शुरू हुई व्यवस्था के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा और लोगों को करीब छह घंटे तक जाम तथा रास्तों की परेशानी का सामना करना पड़ा। इस तरह भाजपा की पदयात्रा राजनीतिक संदेश के साथ-साथ मुख्यमंत्री के इंतजार स्कूली बच्चों की मौजूदगी और शहर में हुई यातायात व्यवस्था को लेकर भी चर्चा में आ गई।
