लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश पर हाई कोर्ट का बड़ा सवाल: कितने केस लंबित, पुलिस ने अब तक क्या किया?
यह मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा है जिसमें इंदौर जिले में महिलाओं और बच्चों के लगातार लापता होने तथा उनकी तलाश में देरी का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि सिर्फ लापता होने के मामलों की संख्या सामने रखना पर्याप्त नहीं है बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस और प्रशासन ने उनकी तलाश के लिए अब तक क्या कार्रवाई की है। खासतौर पर लंबे समय से लंबित मामलों में जांच किस स्तर पर पहुंची है और संबंधित अधिकारियों ने उन्हें सुलझाने के लिए क्या प्रयास किए हैं इसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए। अदालत के निर्देश के बाद अब सरकार को इन सभी पहलुओं पर जवाब देना होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि ऐसे मामलों की नियमित और स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ रही है और किन मामलों में अतिरिक्त प्रयास की जरूरत है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के स्तर पर इन प्रकरणों की समय समय पर समीक्षा करने की मांग भी रखी गई है। साथ ही एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को अधिक प्रभावी बनाने और पुलिस प्रशासन तथा दूसरे संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश केवल एक सामान्य पुलिस प्रक्रिया नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा संवेदनशील विषय है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी महिला या बच्चे के लापता होने के बाद शुरुआती समय में तेजी से कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय तक मामला लंबित रहने पर परिवार की चिंता बढ़ने के साथ तलाश की प्रक्रिया भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
इस मामले में विशेषज्ञ समिति बनाने के साथ केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों के प्रभावी पालन की मांग भी की गई है। अदालत से यह आग्रह किया गया है कि लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए और जिलेवार आंकड़ों को नियमित रूप से सामने लाया जाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार याचिका में सरकारी आंकड़ों की उपलब्धता और उन्हें सार्वजनिक किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अब हाई कोर्ट के नोटिस के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभागों को वर्ष 2021 से अब तक के मामलों का विस्तृत ब्यौरा अदालत के सामने रखना होगा। इसमें लापता महिलाओं और बच्चों की संख्या बरामदगी की स्थिति लंबित मामलों की संख्या और उनकी तलाश के लिए की गई कार्रवाई शामिल हो सकती है। आगामी सुनवाई में इन आंकड़ों के सामने आने के बाद यह तस्वीर और स्पष्ट होगी कि इंदौर जिले में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों में पुलिस की कार्रवाई किस स्थिति में है और लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
