March 8, 2026

प्रदूषण से जूझते मध्य प्रदेश में विकास की भारी कीमत, 15 लाख पेड़ों की कटाई पर उठे गंभीर सवाल

0
82-1767860825

मध्य प्रदेश में एक ओर वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण एनजीटीद्वारा राज्य के आठ शहरों को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की श्रेणी में रखे जाने के बावजूद इन्हीं क्षेत्रों में लाखों पेड़ों को काटने की तैयारी ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केवल इन आठ शहरों में ही करीब 6.50 लाख पेड़ों के कटने का प्रस्ताव है, जबकि पूरे प्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं के चलते लगभग 15 लाख पेड़ संकट में हैं।

जिन शहरों को एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने सबसे अधिक प्रदूषित माना है, उनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सिंगरौली, सागर और देवास शामिल हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीपीसीबीके अनुसार इन शहरों में पीएम-10 का औसत स्तर 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम-2.5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज किया गया है, जो सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है। इसके बावजूद इन्हीं इलाकों में सड़क, मेट्रो, कोयला, ऊर्जा और परिवहन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पुराने और परिपक्व पेड़ों को हटाने की योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।

सबसे बड़ा पर्यावरणीय खतरा सिंगरौली जिले में प्रस्तावित धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना से जुड़ा माना जा रहा है। इस परियोजना के लिए करीब 1,397 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित की गई है, जिसमें अधिकांश हिस्सा घने जंगल का है। जानकारी के अनुसार अब तक लगभग 35 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि करीब 5.70 लाख और पेड़ों के कटने की आशंका जताई जा रही है। सिंगरौली पहले से ही कोयला खनन और ताप विद्युत संयंत्रों के कारण गंभीर प्रदूषण झेल रहा है।राजधानी भोपाल में अयोध्या बायपास को फोरलेन से 10 लेन में तब्दील करने की योजना के तहत लगभग 7,800 पेड़ों को हटाने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा कोलार बायपास और बंगरसिया से भोजपुर तक सड़क निर्माण कार्यों में भी बड़ी संख्या में पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं। इंदौर में रीगल चौराहे पर मेट्रो स्टेशन निर्माण के लिए 1,200 से अधिक पेड़ों पर संकट है, जबकि इंदौर-उज्जैन मार्ग के चौड़ीकरण में करीब 3,000 पेड़ प्रभावित होंगे।

ग्वालियर में थाटीपुर रीडेंसिफिकेशन योजना और अन्य सड़क परियोजनाओं के चलते हजारों पुराने पेड़ हटाए जा चुके हैं या हटाने की प्रक्रिया में हैं। मंडला जिले में बसनिया डेम और उससे जुड़ी नहर व पावर परियोजनाओं से लगभग 2,100 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होगा, जहां करीब 5 लाख पेड़ों के कटने का अनुमान है। डिंडोरी में नर्मदा पर प्रस्तावित राघवपुर बांध और महू-खंडवा रेलवे लाइन परियोजना भी बड़े पैमाने पर वन कटाई का कारण बन रही हैं।पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से जूझ रहे शहरों में हरित आवरण का इस तरह कम होना सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को और गहरा सकता है। वहीं सरकार का तर्क है कि इन परियोजनाओं के बदले बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा, लेकिन विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या नए पौधे दशकों पुराने पेड़ों की भरपाई कर पाएंगे।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *