साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क पकड़ा गया, ‘म्यूल अकाउंट’ से होता था ट्रांजैक्शन
पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश के अलग-अलग राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़े लोगों को जोड़कर एक संगठित नेटवर्क चला रहा था। गिरोह का तरीका बेहद शातिर था, जिसमें पहले लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और सट्टे के जरिए छोटे निवेश पर बड़े मुनाफे का लालच दिया जाता था।
जैसे-जैसे लोग इसमें फंसते थे और बड़ी रकम जीतने लगते थे, गिरोह उन्हें भुगतान करने के बजाय फंसाकर उनकी रकम को म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर देता था। ये बैंक खाते गरीब और सामान्य लोगों के नाम पर थोड़े पैसों के लालच में खुलवाए जाते थे और बाद में इन्हें अवैध ट्रांजैक्शन के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस ने जब शिवनगर कॉलोनी स्थित ठिकाने पर छापा मारा तो वहां से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई शहरों के युवक शामिल हैं। मौके से पुलिस को 23 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 42 एटीएम कार्ड, 8 चेकबुक, 13 पासबुक, पेटीएम स्वाइप मशीन, क्यूआर स्कैनर और एक बिना नंबर की स्कॉर्पियो वाहन सहित भारी मात्रा में डिजिटल और बैंकिंग सामग्री मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह केवल सट्टेबाजी तक सीमित नहीं था, बल्कि साइबर फ्रॉड के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन को नियंत्रित कर रहा था। जब कोई खिलाड़ी बड़ी रकम जीतता था, तो उसे भुगतान देने के बजाय विभिन्न बहानों से उलझाया जाता था और अंत में उसकी रकम को म्यूल अकाउंट्स के जरिए निकाल लिया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों में पवन यादव, देवेंद्र यादव, मिथुन कुमार, पुनीत बघेल, चंदन कुमार, संतोष राजभर, रिशु, गोलू, सागर कुमार और विकास गुप्ता शामिल हैं। पुलिस अब इनके बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहन जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इन खातों में पिछले कुछ महीनों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। सभी खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
Gwalior पुलिस का मानना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता है, लेकिन अभी जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क का दायरा और किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।
