गुना में जैन समाज का मौन आक्रोश: रीवा कांड की SIT जांच और संत सुरक्षा नीति की उठी मांग
गुना शहर में मौन जुलूस की शुरुआत चौधरी मोहल्ला स्थित श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से हुई। हाथों में तख्तियां, आंखों में आंसू और चेहरों पर गहरी पीड़ा लिए समाज के पुरुष, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। बिना नारेबाजी के यह जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों बताशा गली, हाट रोड, रपटा और हनुमान चौराहा से होते हुए कलेक्टोरेट पहुंचा।
कलेक्ट्रेट परिसर में समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि रीवा की घटना केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं हो सकती, बल्कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो और परिस्थितियों को देखते हुए इसकी SIT या न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही पूरे प्रकरण में किसी भी तरह की साजिश या लापरवाही की आशंका को गंभीरता से जांच के दायरे में लिया जाए।
समाज ने मांग की कि घटनास्थल के आसपास के सभी CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित किए जाएं और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि जांच में कोई सुनियोजित साजिश सामने आती है, तो संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जैन समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि जैन साधु-संत पूरी तरह अहिंसक और निहत्थे होते हैं, जो पैदल विहार कर धर्म और शांति का संदेश देते हैं। ऐसे में उनके साथ हो रही लगातार दुर्घटनाएं और घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।
समाज ने देशभर में “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” और “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की भी मांग की है। इसमें विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, ट्रैफिक नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त और विशेष चेतावनी संकेतक लगाने की बात शामिल है। इसके साथ ही संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था स्थापित करने की मांग भी रखी गई।
इस मौन जुलूस में पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह सलूजा, वैश्य समाज अध्यक्ष राजेश मोहन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि और नागरिक शामिल हुए। पूरे जिले में आरोन, राघौगढ़, बीनागंज और कुंभराज सहित कई क्षेत्रों में भी इसी तरह ज्ञापन सौंपे गए और विरोध दर्ज कराया गया।
