July 2, 2026

पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

0
30-1782994565

मध्य प्रदेश:
की राजधानी भोपाल में हाल ही में तैयार किए गए नगर निगम के नए मुख्यालय अटल भवन की निर्माण गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में वर्षा का पानी प्रवेश कर जाने से कार्यालय परिसर के भीतर जलभराव की स्थिति बन गई। घटना के सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

करीब 73 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। उद्देश्य यह था कि नगर निगम की विभिन्न शाखाओं को एक ही परिसर में बेहतर सुविधाओं के साथ संचालित किया जा सके। लेकिन पहली ही बारिश के दौरान भवन के भीतर पानी पहुंचने की घटना ने इस परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।

बारिश के दौरान भवन के विभिन्न हिस्सों में पानी जमा होने से कर्मचारियों और अधिकारियों को कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कार्यालय के भीतर जलभराव की स्थिति बनने से यह सवाल भी उठने लगा कि क्या भवन के निर्माण में जल निकासी और वर्षा प्रबंधन से जुड़े आवश्यक मानकों का पर्याप्त ध्यान रखा गया था।

इस घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली के साथ-साथ परियोजना की तकनीकी निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आमतौर पर इस स्तर की सार्वजनिक परियोजनाओं में निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण, निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन की कई प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। ऐसे में पहली ही बारिश में सामने आई यह स्थिति इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए सरकारी भवन में वर्षा जल निकासी, छत की सीलिंग, ड्रेनेज नेटवर्क और जलरोधक व्यवस्था का विशेष महत्व होता है। यदि इन पहलुओं में किसी स्तर पर कमी रह जाए तो शुरुआती बारिश में ही ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच आवश्यक मानी जा रही है।

घटना के बाद भवन की गुणवत्ता को लेकर लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। सार्वजनिक धन से निर्मित बड़ी परियोजनाओं से उच्च गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोग की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में निर्माण के तुरंत बाद सामने आई इस तरह की समस्या ने जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराता है या नहीं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल यह घटना सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने लेकर आई है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *