March 8, 2026

भोपाल में ब्राह्मण समाज का उग्र प्रदर्शन: CM हाउस घेराव की कोशिश, पुलिस से झड़प; बैरिकेडिंग टूटी, वॉटर कैनन का इस्तेमाल

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भोपाल/ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को उस वक्त हालात तनावपूर्ण हो गए, जब ब्राह्मण समाज के प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हो गई। यह प्रदर्शन सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर किया गया था। ब्राह्मण समाज के लोगों का आरोप है कि संतोष वर्मा ने ब्राह्मण बेटियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। रविवार सुबह बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रोशनपुरा चौराहे पर एकत्र हुए। ग्वालियर से आए वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी शुरू की और मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने लगे। पुलिस ने पहले ही इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे और बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद किया गया था। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़ते हुए आगे बढ़ गए।

रोशनपुरा चौराहे से आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारी बाणगंगा चौराहे तक पहुंच गए। यहां चार लेयर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे भी पार करने की कोशिश करते रहे। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए तीन बार चेतावनी दी, लेकिन जब भीड़ नहीं मानी तो मजबूरी में वॉटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। धक्का-मुक्की और भगदड़ के दौरान कई बुजुर्ग और महिलाएं घायल हो गईं। मौके पर मौजूद एम्बुलेंस और मेडिकल टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में बैठाकर रातीबड़ इलाके में ले जाकर तितर-बितर किया। काफी देर की मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव किया गया। इस बीच राज्य सरकार ने सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ बर्खास्तगी का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। यह प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग GADकी ओर से 12 दिसंबर को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग DoPTको भेजा गया था। हालांकि प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यह प्रस्ताव अधूरा और अस्पष्ट है।

पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार ने बताया कि प्रस्ताव में यह साफ नहीं किया गया है कि सरकार संतोष वर्मा को पूरी तरह बर्खास्त करना चाहती है या सिर्फ उनका प्रमोशन रद्द करना चाहती है। दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं और इनके लिए अलग तरह के तथ्यों और सबूतों की जरूरत होती है। प्रस्ताव में केवल इतना उल्लेख है कि विभिन्न संगठनों से ज्ञापन मिले हैं और वर्मा के बयान से सामाजिक तनाव पैदा हुआ है। इसी अस्पष्टता के कारण आशंका जताई जा रही है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को वापस भी कर सकती है। वहीं, ब्राह्मण समाज और अन्य सवर्ण संगठनों का कहना है कि केवल प्रस्ताव भेजना पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि जब तक ठोस और अंतिम कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, ब्राह्मण रेजिमेंट समेत कई संगठनों ने प्रस्ताव भेजे जाने को पहली सफलता बताया है  लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई में देरी हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल मध्यप्रदेश सरकार ने विवाद बढ़ने के बाद संतोष वर्मा को कृषि विभाग से हटाकर मंत्रालय में उपसचिव के पद पर पदस्थ कर दिया है। बावजूद इसके, सामाजिक संगठनों का आक्रोश कम होता नजर नहीं आ रहा। 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री निवास घेराव की घोषणा पहले ही की जा चुकी है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी और प्रशासनिक हलचल और बढ़ने की संभावना है।

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