भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने
प्रदर्शन के दौरान कई किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध दर्ज कराया और अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए तो कई किसानों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन और यज्ञ किया। आंदोलन स्थल पर किसानों ने सड़क किनारे ही दाल-बाटी बनाकर भोजन किया। रातभर आंदोलन में डटे रहने के बाद कई किसान वहीं खुले आसमान के नीचे आराम करते भी नजर आए। आंदोलन में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली और बड़ी संख्या में Gen Z युवाओं ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि मूंग खरीदी की मौजूदा व्यवस्था और ई-टोकन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह जाते हैं। प्रदर्शनकारी सरकार से इन समस्याओं का स्थायी समाधान और एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया। इसका असर होशंगाबाद रोड, नर्मदापुरम रोड और आसपास के इलाकों में देखने को मिला जहां लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया कि किसानों से संवाद के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है जो आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर चर्चा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सकारात्मक सुझावों का स्वागत करती है लेकिन यह भी जरूरी है कि आंदोलन के कारण आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।
वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हजारों किसान अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें रोकने में लगी हुई है। उन्होंने किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
राजधानी में जारी यह आंदोलन अब केवल किसानों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।
