September 29, 2026

दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग

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भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने महिला दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव होता रहा है और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती चावल को एपीडा से जीआई टैग नहीं दिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार जीआई टैग नहीं दिलाती है तो वे अनशन पर बैठने को भी तैयार हैं।

दिग्विजय सिंह ने किसानों के हित में केंद्र सरकार को पत्र लिखने और संसद में उठाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर असंतोष जताया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों में किसान उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन जीआई टैग न मिलने के कारण उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित मूल्य नहीं पा रहा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन 2016 में वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। अब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के किसानों को वंचित रखा गया।

इस अवसर पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान पर भी बात की। उन्होंने फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा बैंक से रिटायरमेंट लेने के बाद कार को घर बनाकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले हैं। दिग्विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह देखकर प्रेरणा मिली और रिटायरमेंट के बाद की योजना पर भी सोचा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा के सेकंड टर्म के बाद तीसरे टर्म के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी का काम जीवन के अंतिम क्षण तक करेंगे, लेकिन आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।

दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती किसानों को उचित मूल्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग बेहद जरूरी है, ताकि उनका उत्पाद पाकिस्तान और अन्य देशों के बासमती चावल के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।

पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को अब तक किसानों के हित में ठोस कदम नहीं उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और मंत्री मंडल से अपील की कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जल्द से जल्द जीआई टैग दिलवाया जाए और किसानों के आर्थिक नुकसान को रोका जाए।

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