August 16, 2026

देवास में शिप्रा बैराज पानी विवाद गरमाया: कांग्रेस ने उठाया मुद्दा, सांसद-विधायक ने दिया आश्वासन

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मध्‍य प्रदेश । देवास में शिप्रा बैराज से नर्मदा जल आपूर्ति और उससे जुड़े वितरण को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि देवास के हिस्से का पानी मांगलिया क्षेत्र को दिया जा रहा है, जबकि भाजपा पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है। इस मुद्दे ने अब शहर की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है।

गुरुवार को कांग्रेस नेता प्रदीप चौधरी ने इस मामले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने सीधे फोन पर सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी और विधायक गायत्री राजे पवार से बात की और देवास के जल अधिकारों की सुरक्षा की मांग रखी।

फोन पर हुई बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता ने सांसद से कहा कि देवास के नागरिकों के हितों की रक्षा की जाए और उनके हिस्से का पानी किसी अन्य क्षेत्र को न दिया जाए। इस पर सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भी इस मुद्दे पर संवेदनशील हैं और देवास की जनता के साथ खड़े हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर उचित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। सांसद ने यह भी कहा कि वे 24 घंटे जनता की सेवा के लिए उपलब्ध हैं।

इसके बाद कांग्रेस नेता ने विधायक गायत्री राजे पवार से भी फोन पर संपर्क किया। विधायक ने स्पष्ट रूप से कहा कि देवास के हिस्से के पानी में किसी प्रकार की कटौती या अन्य क्षेत्र को स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कांग्रेस की ओर से लगातार इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। बीते कुछ दिनों में ज्ञापन, धरना और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के माध्यम से पार्टी ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। अब यह मामला सीधे जनप्रतिनिधियों तक पहुंचने के बाद और अधिक राजनीतिक महत्व प्राप्त कर चुका है।

शिप्रा बैराज से नर्मदा जल की आपूर्ति देवास शहर के लिए की जाती है, लेकिन कांग्रेस का दावा है कि मांगलिया क्षेत्र को भी इसी स्रोत से पानी दिया जा रहा है। वहीं भाजपा और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि मांगलिया को पानी एनवीडीए के माध्यम से अलग व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराया जा रहा है और देवास के हिस्से में कोई कटौती नहीं की गई है।

इस पूरे विवाद के बीच अब देखना होगा कि प्रशासनिक स्तर पर क्या स्पष्ट निर्णय सामने आता है और दोनों पक्षों के बीच चल रहा यह राजनीतिक तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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