June 2, 2026

भीषण गर्मी में पानी का संकट, भोपाल की मांडवा बस्ती में गंदे पानी की सप्लाई से लोग परेशान

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मध्य प्रदेश । राजधानी भोपाल में एक ओर नगर निगम द्वारा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वार्ड-27 की मांडवा बस्ती के हजारों लोग गंदे और मटमैले पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में जब पानी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, तब दूषित पानी की सप्लाई ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि करीब पांच हजार की आबादी को पीने योग्य पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

मांडवा बस्ती में नियमित पाइपलाइन कनेक्शन नहीं होने के कारण लोगों की पानी की जरूरत टैंकरों के माध्यम से पूरी की जाती है। लेकिन पिछले कई दिनों से टैंकरों में आने वाला पानी साफ नहीं है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पानी मटमैला और गंदगी से भरा हुआ आ रहा है, जिससे उसे पीना तो दूर घरेलू उपयोग में लेना भी मुश्किल हो गया है।

स्थानीय निवासी शेर सिंह सोलंकी के अनुसार बस्ती में टैंकरों से मिलने वाला पानी लगातार खराब गुणवत्ता का आ रहा है। उन्होंने बताया कि पानी का रंग बदला हुआ रहता है और उसमें गंदगी साफ दिखाई देती है। ऐसी स्थिति में लोग पीने के लिए आसपास के क्षेत्रों से पानी लाने को मजबूर हैं। कई परिवार अतिरिक्त खर्च कर बाजार से पानी खरीद रहे हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह भी आसान नहीं है।

रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और निगम अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लोगों की मांग है कि टैंकरों के जरिए साफ और फिल्टर किया हुआ पानी उपलब्ध कराया जाए ताकि गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य संबंधी खतरे न बढ़ें।

गंदे पानी की सप्लाई केवल मांडवा बस्ती तक सीमित नहीं है। शहर के अन्य इलाकों से भी ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं। भानपुर क्षेत्र के समीप स्थित बिहारी बस्ती में भी नर्मदा लाइन से मटमैला पानी आने की शिकायतें मिल रही हैं। इससे नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही महापौर मालती राय ने विधानसभा परिसर के सामने स्थित नगर निगम के फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दावा किया था कि बड़े तालाब से जुड़े जल शोधन संयंत्रों के माध्यम से नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है और ऐसे क्षेत्रों में लोगों को आरओ लगाने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि जमीनी स्थिति कई इलाकों में अलग दिखाई दे रही है, जहां नागरिकों को साफ पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पानी के सेवन से डायरिया, टायफाइड, पीलिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में गर्मी के मौसम में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन जाती है।

अब स्थानीय लोगों की नजर नगर निगम प्रशासन पर टिकी है। रहवासियों को उम्मीद है कि जल्द ही जल गुणवत्ता की जांच कर समस्या का समाधान किया जाएगा ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके और उन्हें सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।

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