जिपं CEO के आदेश पर जनपद CEO की ‘कैंची’! 10 महीने से अधिकारों के लिए भटक रहीं उप सरपंच
भोपाल जिले की ग्राम पंचायत अर्रावती में सरपंच पद के प्रभार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया है। पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बंगले तक पहुंची इस शिकायत ने पंचायत व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उप सरपंच सविता चौहान ने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत CEO के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें आज तक सरपंच के पूर्ण अधिकार नहीं दिए गए।
पूरा मामला अगस्त 2025 से शुरू हुआ, जब अर्रावती के तत्कालीन सरपंच गंगाराम अहिरवार के खिलाफ बैरसिया थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ। प्रकरण दर्ज होने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। पंचायत राज अधिनियम के अनुसार सरपंच का प्रभार उप सरपंच को सौंपा जाना था। इसी नियम के तहत जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने 14 अगस्त 2025 को जनपद CEO देवेशकुमार सराठे को आदेश जारी कर सविता चौहान को सरपंच पद का प्रभार देने के निर्देश दिए थे।
आरोप है कि आदेश जारी होने के बाद भी जनपद CEO ने शुरुआत में प्रभार देने में देरी की। बाद में औपचारिक रूप से चार्ज तो सौंप दिया गया, लेकिन सरपंच के अधिकार और वित्तीय शक्तियां नहीं दी गईं। सविता चौहान का कहना है कि पिछले 10 महीनों से वे अधिकारों के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पंचायत के खातों और बिल भुगतान को लेकर सवाल उठने लगे। सविता चौहान ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना लाखों रुपए के बिल पास किए गए। इतना ही नहीं, बाद में पंचों के सम्मेलन आयोजित किए गए और इसी प्रक्रिया के बीच लेखरात अहिरवार को सरपंच घोषित कर दिया गया। चौहान का कहना है कि यह फैसला जिला पंचायत CEO के आदेश के खिलाफ है और जनपद CEO को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।
उप सरपंच सविता चौहान अपने पति धनवीर सिंह और समर्थकों के साथ पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल से मिलने पहुंचीं। उन्होंने मंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें नियमानुसार अधिकार दिलाने की मांग की। जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में जनपद CEO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जिला पंचायत सदस्य विनय मेहर ने कहा कि जब वरिष्ठ अधिकारी नियमों के तहत सविता चौहान को प्रभार दे चुके हैं, तब किसी दूसरे व्यक्ति को सरपंच घोषित करना नियम विरुद्ध है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने जांच के आदेश दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और आखिर पंचायत व्यवस्था में आदेशों के टकराव का जिम्मेदार कौन माना जाएगा।
