फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट
एसटीएफ के मुताबिक इस नेटवर्क में पासपोर्ट बनवाने के लिए लोगों से करीब 20 हजार रुपए तक लिए जाते थे। पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर आवेदन से लेकर पासपोर्ट तैयार होने तक की ज्यादातर प्रक्रिया एजेंट संभालता था। इसी कड़ी में नसीम अख्तर की भूमिका सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसी उन सभी पासपोर्ट और उनमें इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है जिनमें नसीम की भूमिका बताई गई है।
पूछताछ में नसीम ने बताया कि वह वर्ष 2016 से भोपाल के एमपी नगर इलाके में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करता था। इसी कारोबार के दौरान वह पासपोर्ट संबंधी काम से जुड़ गया और बाद में पासपोर्ट एजेंट के तौर पर काम करने लगा। इसी दौरान भोपाल पासपोर्ट कार्यालय के बाहर उसकी मुलाकात मित्यानंद भिक्षु उर्फ रेयाल चौधरी भिक्षु से हुई। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और कथित तौर पर पासपोर्ट बनवाने का काम शुरू हुआ।
जांच के अनुसार मित्यानंद भिक्षु नसीम को पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों के नाम और दस्तावेज उपलब्ध कराता था। नसीम उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करता था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों की उत्पत्ति कहां से हुई और आवेदन में दर्ज पहचान तथा वास्तविक पहचान के बीच कितना अंतर था।
नसीम के खिलाफ नागपुर में पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। एसटीएफ इस पुराने मामले और वर्तमान नेटवर्क के बीच किसी संभावित कड़ी की भी पड़ताल कर रही है।
एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक इस मामले में नसीम से पहले प्रियान चौधरी जय चौधरी रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब नसीम पांचवां गिरफ्तार आरोपी है। जांच के लिए एसटीएफ की छह टीमें कई राज्यों में दबिश और पूछताछ कर रही हैं। करीब 25 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि रियाल करीब 10 साल पहले भारत आया था। आरोप है कि उसने 2021-22 के आसपास बौद्ध भिक्षुओं के नाम पर नेटवर्क तैयार करना शुरू किया। इसके बाद साथियों के भारतीय नाम से दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हीं के आधार पर पासपोर्ट बनवाए गए।
मामले की जांच में कई ऐसे पासपोर्ट धारकों की जानकारी सामने आई है जिनके वास्तविक नाम और पासपोर्ट में दर्ज नाम अलग पाए गए हैं। यानी दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर पहचान बदलकर पासपोर्ट हासिल किए गए। एसटीएफ अब इन पासपोर्ट धारकों के विदेश यात्रा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का खुलासा होने की संभावना है।
