मास्टर प्लान के लिए भोपाल में दौड़े शहरवासी: मसूद ने सरकार को घेरा अरेरा कॉलोनी की जर्जर सड़कें भी जल्द बनाएं
विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि भोपाल का मास्टर प्लान करीब दो दशक से अटका हुआ है और इसका खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उज्जैन का मास्टर प्लान सामने आ सकता है तो भोपाल का मास्टर प्लान आखिर क्यों अटका हुआ है। उनका कहना था कि एक ही प्रदेश में शहरों के लिए अलग अलग रवैया नहीं होना चाहिए। भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी है और यहां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास की स्पष्ट दिशा तय होना जरूरी है।
मसूद ने कहा कि इस आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं बल्कि शहर के लोगों की बुनियादी जरूरतें हैं। बच्चे युवा महिलाएं व्यापारी और आम नागरिक एक ही मांग कर रहे हैं कि भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं लेकिन शहर के विकास के मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक मास्टर प्लान के अभाव में कई क्षेत्रों में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
इस दौरान मास्टर प्लान के साथ अरेरा कॉलोनी और आई टू से आई एट क्षेत्र की सड़कों का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया गया। इन इलाकों में सीवेज लाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की हालत खराब होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। मसूद ने मांग की कि सड़क निर्माण का काम तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क का भूमिपूजन कौन करता है या निर्माण का श्रेय किसे मिलता है इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। जरूरत यह है कि लोगों को जल्द राहत मिले और पूरी अरेरा कॉलोनी की सड़कों को व्यवस्थित तरीके से बनाया जाए।
मैराथन में स्पाइडर मैन का मास्क पहनकर पहुंचे एक युवक ने भी लोगों का ध्यान खींचा। खुद को स्पीडी बताने वाले युवक ने कहा कि वह भोपाल के भविष्य के लिए मास्टर प्लान लागू कराने की मांग को लेकर दौड़ में शामिल हुआ है। उसका कहना था कि मास्टर प्लान के अभाव में शहर में ट्रैफिक और आम लोगों की आवाजाही से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं।
भोपाल में मास्टर प्लान के लंबे समय से लंबित रहने का असर जमीन के उपयोग नए निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत नगर निगम की ओर से की जा रही सीलिंग कार्रवाई को लेकर भी व्यापारियों और संपत्ति मालिकों में चिंता बनी हुई है। शहर में विकास के नियमों को लेकर स्पष्टता नहीं होने से कई लोगों के सामने असमंजस की स्थिति है। ऐसे में रन फॉर मास्टर प्लान के जरिए उठी आवाज ने सरकार के सामने राजधानी के भविष्य की योजना को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
