June 12, 2026

भोपाल-ग्वालियर के बीच बनेगा नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: 80 किमी तक घटेगी दूरी, साढ़े 5 घंटे में पूरा होगा सफर

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मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सड़क संपर्क को और अधिक तेज, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना आकार लेने जा रही है। राज्य सरकार और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) भोपाल और ग्वालियर के बीच नया 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने हेतु इसी महीने टेंडर जारी किए जाने की योजना है।

प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने के बाद भोपाल और ग्वालियर के बीच की दूरी में लगभग 70 से 80 किलोमीटर तक की कमी आएगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से दूरी लगभग 425 किलोमीटर है, जो नए मार्ग के निर्माण के बाद घटकर करीब 340 से 350 किलोमीटर रह जाएगी। दूरी कम होने का सीधा लाभ यात्रा समय पर भी पड़ेगा। अभी जहां भोपाल से ग्वालियर पहुंचने में 7 से 8 घंटे तक का समय लगता है, वहीं नए कॉरिडोर के चालू होने के बाद यह सफर लगभग साढ़े पांच घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

जानकारी के अनुसार, इस परियोजना को बीओटी (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। एमपीआरडीसी की योजना अगले तीन वर्षों के भीतर इस परियोजना को पूरा करने की है। सड़क विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर प्रदेश के उत्तर और मध्य हिस्सों के बीच यातायात को अधिक सुगम बनाएगा तथा औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियों को भी गति देगा।

सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में विकसित आधुनिक सड़क परियोजनाओं के अध्ययन के बाद मध्य प्रदेश में ग्रीनफील्ड सड़क नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने पर सहमति बनी है। इसी रणनीति के तहत भोपाल-ग्वालियर कॉरिडोर को प्राथमिकता दी गई है। इससे पहले भोपाल-इंदौर, भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना, सागर-जबलपुर और जबलपुर-आशापुर जैसे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट भी विभिन्न चरणों में आगे बढ़ रहे हैं।

एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव के अनुसार, प्रदेश में ऐसे मार्गों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां यातायात का दबाव अधिक है और यात्रा समय कम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर न केवल तेज आवागमन सुनिश्चित करेंगे बल्कि ईंधन की बचत, परिवहन लागत में कमी और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार में भी मददगार साबित होंगे।

प्रदेश में प्रस्तावित अन्य प्रमुख ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में भोपाल-मंदसौर कॉरिडोर शामिल है, जिसकी लंबाई 256 किलोमीटर और अनुमानित लागत 11,550 करोड़ रुपए है। इसी तरह सागर-सतना कॉरिडोर लगभग 218 किलोमीटर लंबा होगा और इसके निर्माण से यात्रा समय लगभग आधा रह जाएगा। वहीं जबलपुर-आशापुर कॉरिडोर भी प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है।

बीओटी मॉडल के तहत विकसित होने वाली इन परियोजनाओं में कुल लागत का एक हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार वहन करती हैं, जबकि शेष निवेश निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाता है। इसके बदले एजेंसी को निर्धारित अवधि तक टोल वसूली का अधिकार दिया जाता है। एमपीआरडीसी भविष्य में भी अधिक यातायात वाले मार्गों पर इसी मॉडल के तहत सड़क परियोजनाएं विकसित करने की योजना बना रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल-ग्वालियर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रदेश के सड़क नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा और इससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

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