राहु-केतु के बीच बना बंधक योग! 18 जुलाई तक मौसम राजनीति और वैश्विक घटनाओं में उथल-पुथल के संकेत
ज्योतिषाचार्य के अनुसार शुक्रवार को चंद्रमा के कुंभ राशि में प्रवेश करने के साथ ही यह योग दोबारा सक्रिय हुआ। इससे पहले 24 जून को इसका प्रभाव समाप्त हुआ था। वर्तमान ग्रह स्थिति में सूर्य चंद्रमा मंगल बुध गुरु शुक्र और शनि सभी राहु और केतु के बीच स्थित हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ऐसी स्थिति में ग्रहों की शुभ ऊर्जा कमजोर पड़ती है और कई क्षेत्रों में अस्थिरता का वातावरण बन सकता है।
मौसम के संबंध में उनका कहना है कि इस अवधि में खंडवृष्टि के योग बन रहे हैं। इसका अर्थ है कि कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है जबकि कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना रहेगी। इससे कृषि और जनजीवन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। मौसम के इस असंतुलन का असर कई राज्यों में अलग-अलग रूप में दिखाई देने की संभावना जताई गई है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रहों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश राजस्थान और दिल्ली सहित कुछ राज्यों में राजनीतिक हलचल बढ़ने के संकेत बताए गए हैं। सत्ता और संगठन स्तर पर फेरबदल विस्तार या नए राजनीतिक समीकरण बनने जैसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनावपूर्ण घटनाओं या कूटनीतिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना व्यक्त की गई है।
व्यापार और आर्थिक गतिविधियों पर भी इस योग का असर पड़ने की बात कही गई है। बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और निवेश से जुड़े फैसलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण निर्णय या चर्चित घटनाएं सामने आ सकती हैं।
ज्योतिषाचार्य का यह भी दावा है कि 18 जुलाई तक जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं की कुंडली में कालसर्प दोष बनने की स्थिति रह सकती है। उनके अनुसार जब चंद्रमा कन्या राशि में प्रवेश करेगा तब यह बंधक योग समाप्त हो जाएगा और ग्रहों की स्थिति सामान्य होने लगेगी।
हालांकि यह सभी आकलन पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनकी वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इन्हें भविष्यवाणी के बजाय ज्योतिषीय दृष्टिकोण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
