दूषित पानी और संक्रमण से बच्चों की मौत का मामला गरमाया, दिग्विजय बोले- दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में दावा किया है कि बिरसा क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह के दौरान 11 आदिवासी बच्चों की बीमारी से मौत हुई है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से अब तक सात बच्चों की मौत की पुष्टि किए जाने की बात पत्र में कही गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार अन्य बच्चों की मौत की जानकारी सामने नहीं लाई जा रही है। उनके मुताबिक बालाघाट जिला चिकित्सालय में 100 से अधिक बच्चों को भर्ती कराया गया है और इनमें कई बच्चों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
दिग्विजय सिंह ने आदिवासी नेता शुभम उईके के हवाले से जिला अस्पताल की स्थिति का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार अस्पताल का बच्चा वार्ड बीमार बच्चों से भर गया है। उन्होंने बोंदारी गांव के समारू धुर्वे के बच्चों साहिल और नामिन की निमोनिया से मौत का जिक्र करते हुए कहा कि बीमारी ने कई गरीब परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। वहीं अन्य प्रभावित परिवारों के बच्चों की मौत का भी पत्र में उल्लेख किया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव के साथ चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम प्रभावित गांवों का दौरा करे। उन्होंने संक्रमित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाकर बच्चों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग रखी है।
दिग्विजय सिंह ने गंभीर रूप से बीमार बच्चों को जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर या भोपाल के बेहतर चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराने और उनका पूरा इलाज राज्य सरकार की ओर से कराने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और राज्य स्तरीय जांच के बाद यदि किसी विभाग या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
