October 24, 2026

शिवपुरी में आशुतोष ओज के कहानी संग्रह ‘प्रेमपाश’ का विमोचन, वक्ताओं ने कहानियों को संस्कार और सामाजिक बदलाव का माध्यम बताया

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मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में 22 अक्टूबर 2026 को कहानीकार आशुतोष ओज के कहानी संग्रह ‘प्रेमपाश’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर साहित्य, सामाजिक जीवन और संस्कारों में कहानियों की भूमिका पर विचार रखे गए। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि कहानी केवल घटनाओं का वर्णन नहीं होती, बल्कि समाज को दिशा देने, जीवन मूल्यों को मजबूत करने और लोगों को अपने आसपास की समस्याओं के प्रति जागरूक बनाने का माध्यम भी है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ प्रचारक श्रीधर पराड़कर ने कहा कि कहानियों के माध्यम से समाज को दिशा और संस्कार मिलते हैं। हर व्यक्ति के जीवन की अपनी कहानी होती है और उसे शब्दों के माध्यम से प्रस्तुत करने वाला कहानीकार कहलाता है। उन्होंने कहा कि गीता और रामचरितमानस में निहित जीवन मूल्यों को अलग-अलग समय में परिवार के बुजुर्गों ने कहानियों के जरिए बच्चों तक पहुंचाया। दादा-दादी और नाना-नानी द्वारा सुनाई जाने वाली कहानियां बचपन से ही संस्कार देने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं।

श्रीधर पराड़कर ने कहा कि आशुतोष ओज की कहानियां रोजमर्रा के जीवन में घटने वाली घटनाओं और अनुभवों से जुड़ी हैं। उनके अनुसार, भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कहानी एक सशक्त माध्यम है। इसके जरिए सामान्य जीवन की परिस्थितियों और सामाजिक अनुभवों को प्रभावी ढंग से सामने रखा जा सकता है। उन्होंने कहानी लेखन की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह विधा जीवन और समाज को समझने में मदद करती है।

विद्या भारती के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री और वरिष्ठ प्रचारक राम अरावकर ने संग्रह के विमोचन को व्यक्तिगत प्रसन्नता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आशुतोष को बचपन से देखते आए हैं और अब उनका कहानी लेखन के क्षेत्र में प्रवेश करना खुशी की बात है। उन्होंने बताया कि ‘प्रेमपाश’ में राष्ट्रीयता के भावों से जुड़ी कहानियां शामिल हैं। उनके अनुसार, कहानी केवल घटनाओं को दर्ज करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज में आदर्श स्थापित करने और लोगों को लोभ-लालच से दूर रहने की प्रेरणा देने का काम भी करती है।

राम अरावकर ने परिवारों में कहानी सुनाने की पुरानी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले घरों में बुजुर्ग बच्चों को कहानियां सुनाकर जीवन मूल्यों और संस्कारों से परिचित कराते थे। समय के साथ परिवारों के बिखराव, कुटुंब व्यवस्था में बदलाव और तकनीक के बढ़ते प्रभाव ने इस परंपरा को प्रभावित किया है। ऐसे में साहित्य और कहानी लेखन के माध्यम से संस्कारों तथा सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के उप महानिरीक्षक राजीव लोचन शुक्ला ने कहा कि सामाजिक समस्याओं के बढ़ने का एक कारण लोगों का चुपचाप तमाशा देखते रहना भी है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं को समाज अपने आसपास देखता है, उनके बारे में मुखर होकर बोलना और लिखना समय की मांग है। प्रत्येक नागरिक को इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ताकि समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सके।

राजीव लोचन शुक्ला ने आशुतोष ओज के लेखन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने आसपास मौजूद समस्याओं को कहानी संग्रह के माध्यम से प्रस्तुत किया है। सरल भाषा में आम लोगों के जीवन से जुड़ी कहानियों को सामने लाना महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने इसके लिए कहानीकार को बधाई दी।

इस अवसर पर सौम्या उपाध्याय और डॉ. आकांक्षा गौड़ ने कहानी संग्रह की समीक्षा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन हेमलता चौधरी ने किया। समारोह में विद्यापीठ के पूर्व छात्र और भोपाल के अपर सत्र न्यायाधीश संजय अग्रवाल का अभिनंदन भी किया गया। मंच पर डॉ. कुमार संजीव, पुरुषोत्तम गौतम और प्रमोद भार्गव सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने अतिथियों का स्वागत किया। अंत में आशुतोष शर्मा ओज ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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