आजीविका मिशन से बदली महिलाओं की तकदीर, कृष्णा आजीविका समूह बना आत्मनिर्भरता की मिसाल
कुछ वर्ष पहले जब इन महिलाओं ने समूह की शुरुआत की थी तब उनके पास सीमित संसाधन थे लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत की कमी नहीं थी। उन्होंने नियमित बैठकों मासिक बचत समय पर ऋण वापसी और सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा को अपनाकर समूह को मजबूत बनाया। इसी अनुशासन और एकजुटता ने धीरे धीरे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने का रास्ता दिखाया।
शुरुआती छह महीनों में ब्लॉक कार्यालय के मार्गदर्शन से समूह को 13 हजार रुपये की चक्रीय निधि प्राप्त हुई। इसी छोटी राशि से उन्होंने अपनी आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत की। बाद में बैंक सखी के सहयोग से समूह को प्रथम सीसीएल के रूप में एक लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि को महिलाओं ने कृषि कार्य में निवेश किया और 12 महीनों के भीतर ब्याज सहित पूरा ऋण वापस कर दिया।
समूह की सक्रियता और भरोसेमंद कार्यप्रणाली को देखते हुए उन्हें द्वितीय सीसीएल के रूप में 2 लाख रुपये और तृतीय सीसीएल में 3 लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि से महिलाओं ने बकरी पालन जनरल स्टोर पान दुकान सब्जी उत्पादन ऑनलाइन सेवा केंद्र और ट्रैक्टर खरीद जैसे छोटे छोटे व्यवसाय शुरू किए। इन गतिविधियों से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई बल्कि गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए।
इसके बाद चतुर्थ सीसीएल के रूप में फिर 3 लाख रुपये की सहायता मिली जिससे महिलाओं ने अपने व्यवसायों का विस्तार किया। साथ ही ग्राम संगठन से 1 लाख 10 हजार रुपये की सीआईएफ राशि भी प्राप्त हुई जिसका उपयोग कृषि और बच्चों की शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया गया।
आज इस समूह की कई महिलाएं अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वछला दशहरे की मासिक आय करीब 20 हजार रुपये पुस्तकला वर्मा की लगभग 25 हजार रुपये रामबती दमाहे और इमला शेंडे की करीब 15 हजार रुपये तथा विमला नागपुरे की लगभग 8 हजार रुपये हो गई है। अन्य सदस्य भी बकरी पालन और कृषि कार्य से हर महीने 4 से 5 हजार रुपये की आय कमा रही हैं।
इस समूह की सबसे प्रेरणादायक कहानी नीरा दशहरे की है। उन्होंने समूह से मिले सहयोग और ऋण का उपयोग अपनी तीनों बेटियों की शिक्षा के लिए किया। आज उनकी तीनों बेटियां अच्छी नौकरी कर रही हैं और लगभग एक लाख रुपये मासिक आय अर्जित कर रही हैं।
ग्राम कुल्पा की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि जब महिलाएं संगठित होकर आगे बढ़ती हैं तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं बल्कि पूरे समाज में आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई रोशनी भी फैला सकती हैं।
