दतिया नगरपालिका में सिस्टम की बलि चढ़ा एक बाबू: प्रताड़ना से तंग आकर लिपिक ने दी जान, मौत से पहले वीडियो में सीएमओ की काली करतूतों का किया पर्दाफाश
दिलीप सिंह ने मरने से पहले अपनी मौत का जिम्मेदार दतिया नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी सीएमओ नागेंद्र सिंह गुर्जर और दो अन्य कर्मचारियों को ठहराया है। दिलीप का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। वीडियो में उन्होंने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएमओ द्वारा उन पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार में शामिल होने के लिए दबाव बनाया गया था। जब उन्होंने इस गलत काम का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया और प्रलोभन को ठुकरा दिया, तो उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई शुरू हो गई।
प्रताड़ना का स्तर इस कदर गिर गया कि एक पढ़े लिखे लिपिक को सजा देने के उद्देश्य से उनकी ड्यूटी ट्रेचिंग ग्राउंड कचरा डंपिंग साइट पर लगा दी गई। दिलीप ने वीडियो में रोते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की कि एक बाबू होने के बावजूद उन्हें कचरा गाड़ियों की गिनती करने जैसा काम सौंपा गया, जिसने उनके मानसिक आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाई। यह कदम उन्हें नीचा दिखाने और मानसिक रूप से तोड़ने के लिए उठाया गया था। हद तो तब हो गई जब दिलीप इस अपमानजनक स्थिति से राहत पाने के लिए और शाखा बदलने का आवेदन लेकर सीएमओ नागेंद्र सिंह के पास पहुंचे। दिलीप के अनुसार, मदद करने के बजाय सीएमओ ने उन्हें मां-बहन की भद्दी गालियां दीं और जलील किया।
इसी अपमान और मानसिक आघात से दुखी होकर दिलीप सिंह गौड़ ने आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने वीडियो में स्पष्ट मांग की है कि उनकी मौत के बाद सीएमओ और अन्य दो कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया जाए। दूसरी ओर, जब इन गंभीर आरोपों को लेकर सीएमओ नागेंद्र सिंह गुर्जर से सवाल किए गए, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की प्रताड़ना से इनकार कर दिया। हालांकि, मृतक का वीडियो अब पुलिस के पास है और झांसी व दतिया पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में जुट गई है।
