March 8, 2026

सूदखोरी का 'खूनी' जाल: नर्मदापुरम में व्यापारी के सुसाइड के 30 दिन बाद पिता-पुत्र समेत 3 पर FIR

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नर्मदापुरम (सोहागपुर)। कर्ज की किश्तें तो खत्म हो गईं, लेकिन सूदखोरों की भूख शांत नहीं हुई; अंततः एक हंसता-खेलता कारोबारी सिस्टम प्रताड़ना की बलि चढ़ गया। सोहागपुर के रेडीमेड कपड़ा व्यापारी कैलाश आसवानी आत्महत्या मामले में पुलिस ने एक महीने की लंबी जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की है। सुसाइड नोट और पुख्ता सबूतों के आधार पर पुलिस ने तीन रसूखदार व्यापारियों के खिलाफ ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ (Abetment to Suicide) का संगीन मामला दर्ज किया है।
 
अपमान की वो आग जिसने जान ले ली
कैलाश आसवानी अपने रेडीमेड कपड़ों के व्यवसाय को विस्तार देने के लिए कुछ स्थानीय व्यापारियों के संपर्क में आए थे। पुलिस जांच के अनुसार: सोहागपुर के व्यापारी छबलदास तोलानी, उनका पुत्र हितेश तोलानी और इटारसी का व्यापारी वीरेंद्र जैन।

प्रताड़ना की इंतहा:

कैलाश लगातार ब्याज और मूल राशि चुका रहे थे, लेकिन आरोपी उनसे ‘मनमाना और अवैध’ ब्याज मांग रहे थे। पैसा न दे पाने की स्थिति में उन्हें सार्वजनिक जगहों पर बेइज्जत किया जाता था। इसी सामाजिक अपमान और मानसिक दबाव ने कैलाश को भीतर से तोड़ दिया।

लॉज के कमरा नंबर 107 में खौफनाक अंत
बीते 28 जनवरी को कैलाश बिना किसी को बताए घर से निकले और माखननगर स्थित ‘राधे-राधे लॉज’ पहुँच गए। अगले दिन जब उन्होंने दरवाजा नहीं खोला, तो होटल प्रबंधन की सूचना पर पुलिस पहुँची। कमरे के अंदर का दृश्य विचलित करने वाला था; बिस्तर पर कैलाश का निर्जीव शरीर पड़ा था और पास ही सल्फास की खाली डिब्बी मिली। उनके पास से बरामद एक भावुक सुसाइड नोट ने उन चेहरों को बेनकाब कर दिया, जो उनकी मौत की पटकथा लिख रहे थे।

पुलिस की कार्रवाई: 30 दिन बाद कसा शिकंजा
थाना प्रभारी उषा मरावी के नेतृत्व में पुलिस ने एक महीने तक सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और गवाहों के बयानों का बारीकी से मिलान किया।शनिवार रात पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि इन सूदखोरों ने और कितने व्यापारियों को अपनी गिरफ्त में ले रखा है।यह घटना एक कड़वा सबक है कि अवैध ब्याजखोरी का धंधा केवल पैसा नहीं, बल्कि इंसान का मानसिक सुकून और अंततः उसकी सांसें भी छीन लेता है। 30 दिन बाद हुई यह कानूनी कार्रवाई पीड़ित परिवार के लिए इंसाफ की पहली किरण है।

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