लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर 2 करोड़ की फिरौती, दिल्ली से सिवनी तक पहुंची जांच, मोबाइल नंबर से खुला एमपी कनेक्शन
नई दिल्ली । लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर दिल्ली के एक व्यापारी से 2 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। तकनीकी जांच के दौरान इस मामले का कनेक्शन मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से जुड़ने के बाद दिल्ली पुलिस की विशेष टीम जांच के लिए सिवनी पहुंची। फिलहाल पुलिस साइबर एंगल से मामले की गहन पड़ताल कर रही है और कॉल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार दिल्ली के एक कारोबारी को व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकी दी गई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताते हुए 2 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की। व्यापारी को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई थी। घटना के बाद व्यापारी ने पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने कॉल में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर की तकनीकी ट्रैकिंग की। प्रारंभिक जांच में पता चला कि संबंधित नंबर मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के एक युवक के नाम पर पंजीकृत है। इसी जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम स्थानीय पुलिस के सहयोग से सिवनी पहुंची और संबंधित युवक से पूछताछ की।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक युवक का नाम सुनील सतनामी बताया जा रहा है। हालांकि अब तक की जांच में उसके सीधे तौर पर फिरौती मांगने या किसी संगठित आपराधिक गतिविधि में शामिल होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस ने युवक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसके डिजिटल डेटा की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि संभव है किसी तीसरे व्यक्ति ने अनाधिकृत तरीके से युवक के मोबाइल नंबर का उपयोग किया हो या फिर सिम कार्ड का दुरुपयोग किया गया हो। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए साइबर विशेषज्ञ कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट प्रोटोकॉल लॉग, व्हाट्सएप गतिविधियों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल वास्तव में किस लोकेशन से की गई थी और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। हाल के वर्षों में कुख्यात गैंगों के नाम का इस्तेमाल कर व्यापारियों, डॉक्टरों और उद्योगपतियों से फिरौती मांगने के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कई बार अपराधियों ने फर्जी पहचान और इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का सहारा लिया है।
मध्य प्रदेश और दिल्ली पुलिस के बीच समन्वय बनाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर तकनीकी पहलू की जांच की जा रही है और जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि जरूरत पड़ी तो जांच का दायरा अन्य राज्यों तक भी बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि धमकी भरी व्हाट्सएप कॉल किसने की, मोबाइल नंबर का उपयोग कैसे हुआ और क्या इसके पीछे कोई संगठित आपराधिक नेटवर्क सक्रिय है।
मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जल्द महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
