थायरॉइड की बीमारी आंखों पर भी कर सकती है अटैक नजर जाने तक की आ सकती है नौबत इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
नई गाइडलाइंस वर्ल्ड सोसाइटी ऑफ ऑप्थेलमिक प्लास्टिक रिकंस्ट्रक्टिव एंड एस्थेटिक सर्जरी और इंटरनेशनल थायराइड आई डिजीज सोसाइटी की ओर से तैयार की गई हैं। इन्हें मेडिकल जर्नल ऑप्थेलमिक प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी में प्रकाशित किया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य अलग अलग देशों में मरीजों की बीमारी की गंभीरता के हिसाब से जांच और उपचार की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों के अनुसार थायरॉइड आई डिजीज में शरीर का इम्यून सिस्टम आंखों के आसपास मौजूद मांसपेशियों और टिश्यू को प्रभावित करने लगता है। इसके कारण आंखों के आसपास सूजन और लालपन हो सकता है। आंखों में जलन महसूस हो सकती है और कुछ मरीजों में आंखें बाहर की तरफ उभरने लगती हैं। आंखों की मांसपेशियों पर असर पड़ने से दोहरा दिखाई देने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे लक्षणों को केवल सामान्य थायरॉइड समस्या समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
सबसे गंभीर स्थिति तब बन सकती है जब बीमारी के कारण आंख के पीछे मौजूद ऑप्टिक नर्व पर दबाव पड़ने लगे। इससे नजर कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है और गंभीर मामलों में रोशनी जाने तक की स्थिति बन सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक थायरॉइड आई डिजीज के मामले बढ़ रहे हैं। महिलाओं में इस बीमारी के मामले अधिक देखे जा सकते हैं जबकि पुरुषों में गंभीर आंखों की समस्या और दृष्टि प्रभावित होने का खतरा ज्यादा हो सकता है। हाइपरथायरायडिज्म यानी थायरॉइड हार्मोन बढ़ने की स्थिति वाले मरीजों में भी इसका खतरा अधिक माना जाता है।
नई ग्लोबल गाइडलाइंस में थायरॉइड आई डिजीज को तीन स्तरों में बांटने की सिफारिश की गई है। इनमें बेसिक इंटरमीडिएट और एडवांस स्तर शामिल हैं। इसका उद्देश्य बीमारी की गंभीरता के अनुसार मरीज का उपचार तय करना है। अगर किसी मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर है तो उसे बेहतर सुविधाओं वाले बड़े अस्पताल या विशेषज्ञ केंद्र में रेफर करने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
नई गाइडलाइंस में मरीज की आंखों की जांच के साथ थायरॉइड हार्मोन आंखों की रोशनी और डबल विजन जैसी समस्याओं का मूल्यांकन करने पर जोर दिया गया है। जरूरत पड़ने पर CT स्कैन MRI और अन्य एडवांस जांच भी कराई जा सकती हैं। इसलिए अगर थायरॉइड की समस्या के साथ आंखों में सूजन आंखों का उभरना लालिमा धुंधला दिखाई देना या दोहरा दिखना जैसे लक्षण सामने आएं तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर बीमारी की पहचान होने से गंभीर जटिलताओं को रोकने और आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने की संभावना बेहतर हो सकती है।
