प्रेग्नेंसी में योगासन क्यों जरूरी? मंत्रालय ने बताए बड़े फायदे, मां-बच्चे दोनों को मिलती है सुरक्षा और ताकत
मंत्रालय के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित योग करने से न केवल शरीर मजबूत और लचीला बनता है, बल्कि मानसिक शांति भी बनी रहती है। यह समय अक्सर महिलाओं के लिए तनाव, चिंता और थकान से भरा हो सकता है, लेकिन योग इन सभी समस्याओं को काफी हद तक कम करने में मदद करता है।
गर्भावस्था में महिलाओं को अक्सर पीठ दर्द, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में कठिनाई और नींद की समस्या जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हल्के और सुरक्षित योगासन इन समस्याओं से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। योग शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे ऊर्जा बनी रहती है और थकान कम महसूस होती है।
आयुष मंत्रालय के विशेषज्ञों के अनुसार, योग न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है बल्कि यह मानसिक संतुलन भी बनाए रखता है। गर्भवती महिला जब शांत और तनावमुक्त रहती है, तो उसका सीधा सकारात्मक असर बच्चे के विकास पर भी पड़ता है। यही कारण है कि योग को मां और बच्चे दोनों के लिए लाभकारी माना गया है।
योग का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह प्रसव प्रक्रिया को आसान बनाता है। नियमित अभ्यास से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और लचीलापन बढ़ता है, जिससे डिलीवरी के समय शरीर बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देता है। साथ ही प्रसव के बाद रिकवरी भी तेज होती है।
आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि गर्भावस्था के हर चरण में योग अलग-अलग तरीके से लाभ देता है। शुरुआती महीनों में हल्के प्राणायाम और स्ट्रेचिंग, जबकि बाद के महीनों में डॉक्टर की सलाह से ही सरल और सुरक्षित योगासन करने चाहिए।
मंत्रालय ने मदर्स डे (10 मई) के मौके पर खास अपील की है कि हर गर्भवती महिला योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए। उनका कहना है कि “एक स्वस्थ मां ही एक स्वस्थ बच्चे की पहली नींव होती है।”
विशेषज्ञों की राय है कि योग को बिना विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर महिला की स्थिति अलग होती है। सही मार्गदर्शन के साथ किया गया योग न केवल सुरक्षित होता है, बल्कि यह मां और बच्चे दोनों के लिए एक मजबूत और स्वस्थ भविष्य की नींव भी रखता है।
