May 25, 2026

हीट स्ट्रोक से बच्चों की सुरक्षा: WHO ने बताए खतरनाक लक्षण और बचाव के तरीके

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मध्य प्रदेश । देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी, लू और उमस का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिससे खासकर छोटे बच्चों के लिए खतरा और अधिक बढ़ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बच्चों की अतिरिक्त देखभाल करने की सलाह दी है।

WHO के अनुसार, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से गर्म हो जाता है, जिससे उनमें डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते लक्षणों की पहचान और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है।

हीट स्ट्रोक के लक्षणों पर रखें नजर
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक बच्चों में गर्मी से जुड़ी गंभीर समस्या के संकेत कई तरह से दिखाई दे सकते हैं। इनमें शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना, तेज सिरदर्द, अत्यधिक पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन शामिल हैं। इसके अलावा तेज दिल की धड़कन, सांस फूलना, कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में बच्चा बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है या उल्टी की शिकायत भी करता है।

हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें फर्स्ट एड
WHO ने बताया है कि अगर बच्चे में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो घबराने की बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू करना चाहिए। बच्चे को सबसे पहले किसी छायादार या ठंडी जगह पर ले जाएं। अगर बच्चा होश में है तो उसे छोटे-छोटे घूंट में पानी, ओआरएस या नींबू पानी पिलाएं। बच्चे को लिटाकर उसके पैरों को थोड़ा ऊंचा रखें और शरीर पर ठंडे पानी से स्पंज करें ताकि शरीर का तापमान कम हो सके।
अगर बच्चा बेहोश हो जाए तो उसे पानी या कोई भी तरल पदार्थ जबरदस्ती न दें। उल्टी की स्थिति में बच्चे को करवट पर लिटाना चाहिए ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
WHO ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को सीधे धूप में न भेजें और भारी या गर्म कपड़े बिल्कुल न पहनाएं। गर्मी के समय दोपहर में बच्चों को बाहर खेलने से रोकना चाहिए। घर से निकलते समय पानी की बोतल, टोपी और छाता जरूर साथ रखें। बच्चों को हमेशा हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनाने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर कदम उठाकर बच्चों को हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है। अगर लक्षण गंभीर दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, क्योंकि देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

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