स्ट्रोक के बाद कमजोरी और बिगड़े संतुलन से मिलेगी राहत! फिजियोथेरेपी क्यों है मरीजों के लिए जरूरी, डॉक्टर से समझें
स्ट्रोक के बाद मरीज को कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई लोगों में हाथ और पैरों में कमजोरी आ जाती है जबकि कुछ मरीजों को चलने फिरने में परेशानी होने लगती है। शरीर का संतुलन बिगड़ना और रोजमर्रा के सामान्य कामों को करने में कठिनाई भी स्ट्रोक के बाद होने वाली समस्याओं में शामिल हो सकती है। ऐसे समय में मरीज की स्थिति के अनुसार शुरू किया गया फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम उसकी मूवमेंट और बैलेंस को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रोक के बाद रिहैबिलिटेशन को केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रखना चाहिए। मरीज के उपचार और उसकी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए घर पर भी सुरक्षित तरीके से एक्सरसाइज और गतिविधियां जारी रखना उपयोगी हो सकता है। हालांकि किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज बिना डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के शुरू नहीं करनी चाहिए। हर स्ट्रोक मरीज की स्थिति अलग हो सकती है इसलिए उसके लिए रिहैबिलिटेशन का तरीका भी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तय किया जाना जरूरी है।
फिजियोथेरेपी का मुख्य उद्देश्य केवल दर्द कम करना नहीं है बल्कि शरीर की कार्यक्षमता और मूवमेंट को बेहतर बनाने में मदद करना भी है। स्ट्रोक के बाद शरीर के प्रभावित हिस्सों को दोबारा सक्रिय करने के लिए नियमित और सही अभ्यास महत्वपूर्ण हो सकता है। एक्सरसाइज और रिहैबिलिटेशन की मदद से मरीज को शरीर की गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण पाने और संतुलन सुधारने में सहायता मिल सकती है। इससे धीरे-धीरे रोजमर्रा के कामों को करने में भी मदद मिल सकती है।
आज फिजियोथेरेपी का क्षेत्र तेजी से तकनीक आधारित भी होता जा रहा है। मोशन एनालिसिस सेंसर बेस्ड मॉनिटरिंग वियरेबल डिवाइस डिजिटल एक्सरसाइज प्रोग्राम और रोबोटिक रिहैबिलिटेशन जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है। इन आधुनिक तरीकों की मदद से मरीज की गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझने और उसकी प्रगति पर नजर रखने में सहायता मिल सकती है।
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के मौके पर विशेषज्ञ कम मूवमेंट वाली लाइफस्टाइल को भी बड़ी समस्या मानते हैं। आज के समय में घंटों तक ऑफिस में बैठे रहना बढ़ता स्क्रीन टाइम और एक्सरसाइज की कमी शरीर को धीरे-धीरे कमजोर कर सकती है। शारीरिक गतिविधि कम होने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए केवल बीमारी या दर्द होने के बाद ही नहीं बल्कि स्वस्थ रहने के लिए भी हर उम्र के लोगों को अपनी दिनचर्या में नियमित शारीरिक गतिविधि को शामिल करना चाहिए।
कुल मिलाकर फिजियोथेरेपी को केवल हड्डियों और जोड़ों के दर्द तक सीमित समझना सही नहीं है। स्ट्रोक के बाद सही रिहैबिलिटेशन मरीज की मूवमेंट और संतुलन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञ की निगरानी में नियमित एक्सरसाइज और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर शरीर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
