डायबिटीज के मरीज जरूर जान लें खाने के बाद 5 से 20 मिनट टहलने का क्या होता है असर रिसर्च में सामने आई जरूरी बातें
भोजन करने के बाद शरीर खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर ग्लूकोज में बदलता है। इससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। इस दौरान जब व्यक्ति लगातार बैठा रहता है तो मांसपेशियों की गतिविधि कम होती है। वहीं टहलने से मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और वे ऊर्जा के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल करने लगती हैं। इस प्रक्रिया से भोजन के बाद ब्लड शुगर में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित करने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच बीच में उठकर चलने की सलाह देते हैं।
अगर आपके पास समय कम है तो भोजन के बाद 5 मिनट की हल्की वॉक से शुरुआत की जा सकती है। यह उन लोगों के लिए आसान विकल्प हो सकता है जो ऑफिस में काम करते हैं या जिनकी दिनचर्या काफी व्यस्त रहती है। कुछ मिनट चलने से भी शरीर को निष्क्रिय रहने के मुकाबले गतिविधि मिलती है। हालांकि इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति भोजन की मात्रा और ग्लूकोज नियंत्रण पर निर्भर कर सकता है।
वहीं 10 मिनट की वॉक उन लोगों के लिए उपयोगी दिनचर्या बन सकती है जो भोजन के बाद थोड़ा अधिक समय निकाल सकते हैं। सामान्य गति से टहलने से मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं और भोजन के बाद ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इसके लिए जरूरी नहीं कि तेज गति से चला जाए। आरामदायक चाल से नियमित रूप से चलना भी शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प है।
यदि आप आराम से 20 मिनट तक टहल सकते हैं तो यह आपकी दैनिक शारीरिक गतिविधि बढ़ाने में योगदान दे सकता है। नियमित वॉक से ब्लड शुगर नियंत्रण के साथ हृदय स्वास्थ्य और फिटनेस को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि केवल 20 मिनट चलने से हर व्यक्ति का ब्लड शुगर निश्चित रूप से सामान्य हो जाएगा ऐसा नहीं कहा जा सकता। वॉक की अवधि और गति का चुनाव अपनी क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार करना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी एक दिन लंबी वॉक करने के बजाय नियमित रूप से चलने की आदत विकसित की जाए। भोजन के बाद हल्की वॉक करना आसान शुरुआत हो सकती है। इसके साथ संतुलित आहार पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन भी जरूरी है। डायबिटीज के मरीज अपनी दवा या इंसुलिन की मात्रा केवल वॉक शुरू करने के आधार पर खुद से न बदलें। यदि चलने के दौरान चक्कर कमजोरी या पसीना आने जैसे लक्षण महसूस हों तो रुककर ब्लड शुगर की जांच और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इस तरह अपनी दिनचर्या में छोटी लेकिन नियमित गतिविधि शामिल करके ब्लड शुगर नियंत्रण की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
