March 8, 2026

ब्रिटेन, कनाडा और आस्ट्रेलिया समेत 176 देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी: अब इजराइल ने दिया ये जवाब

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Palestine recognition

Palestine state recognition: ब्रिटेन, कनाडा और आस्ट्रेलिया समेत कुल 176 देशों ने आधिकारिक तौर पर फिलिस्तीन (Palestine state recognition) को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी है। यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब मध्य पूर्व में शांति की संभावना पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। ब्रिटेन(UK Palestine support) के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि यह मान्यता दो राष्ट्रों के बीच स्थायी शांति का रास्ता खोल सकती है। ब्रिटेन का यह कदम कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों के साथ मेल खाता है, जिन्होंने पहले ही फिलिस्तीन को मान्यता (Independent Palestine 2025) दी है। ब्रिटेन ने यह बात साफ की है कि फिलिस्तीन को मान्यता देने का मतलब हमास को समर्थन देना नहीं है। हमास पर प्रतिबंध जारी रहेगा। यह कदम इजराइल और अमेरिका की आलोचना के बीच आया है। दोनों देशों ने इसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला बताया, जबकि ब्रिटेन ने इसे स्थायी शांति की ओर एक सकारात्मक कदम बताया है। उधर फिलिस्तीन (Global support for Palestine) को मान्यता मिलने से ICC (अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय) में इजराइल पर केस दर्ज करने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

अन्य देशों ने भी मान्यता दी
ब्रिटेन से पहले मई 2024 में नॉर्वे, आयरलैंड और स्पेन ने भी फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दी थी। इन देशों ने कहा था कि यह मान्यता मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इजरायल ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और इन देशों से अपने राजदूत वापस बुला लिए।

फिलिस्तीन की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्थिति
फिलिस्तीन में विश्व के अधिकतर देशों का लगभग 76% हिस्सा बनता है। हालांकि, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देशों ने फिलिस्तीन को पूर्ण मान्यता नहीं दी है, फिर भी इस कदम से फिलिस्तीन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता और स्थिति मजबूत हुई है।

फिलिस्तीन के लिए बड़ी जीत, लेकिन चुनौतियां अभी बाकी
यह कूटनीतिक सफलता फिलिस्तीन के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक स्वतंत्रता और शांति के लिए अभी भी कई मुश्किलें हैं। क्षेत्रीय संघर्ष और राजनीतिक मतभेद फिलिस्तीन के भविष्य के रास्ते में बड़ी बाधाएं बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब मिलकर काम करना होगा ताकि इजराइल-फिलिस्तीन विवाद का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता देने पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं
इजराइल ने इस फैसले की तीखी आलोचना की और इन देशों से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

अमेरिका ने फिलहाल इस कदम से दूरी बनाते हुए कहा कि बातचीत के जरिए समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए।

अरब लीग और कई मुस्लिम देशों ने इस फैसले का स्वागत किया है।

इस मामले के कुछ अहम पहलू
– आने वाले हफ्तों में यह देखा जाएगा कि अन्य यूरोपीय देश भी इस कदम का अनुसरण करते हैं या नहीं।

–  इजराइल और फिलिस्तीन के बीच मध्यस्थता की कोशिशें बढ़ सकती हैं, जिसमें अमेरिका, कतर या यूएन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

– यूनाइटेड नेशंस जनरल असेम्बली (UNGA) में फिलिस्तीन की स्थायी सदस्यता को लेकर नए सिरे से बहस हो सकती है।

– यह भी संभव है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में इजरायल की नीतियों को लेकर कानूनी दबाव बढ़े।

भारत : स्थिति पर निगाहें
भारत फिलिस्तीन के साथ ऐतिहासिक रूप से सहानुभूति रखता आया है, लेकिन हाल के बरसों में इजराइल के साथ रिश्तों में भी मजबूती आई है। ऐसे में भारत की राजनयिक रणनीति देखने लायक होगी। टिकटॉक विवाद और अमेरिका-चीन तनाव के बीच यह मान्यता, पश्चिमी देशों की मध्य पूर्व नीति फिर से परिभाषित करने का संकेत हो सकती है।

अब भविष्य में क्या होगा ?
बहरहाल फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले देशों की संख्या बढ़ने से क्षेत्र में शांति की आशाएं बढ़ी हैं। हालांकि, इसके साथ ही यह भी ज़रूरी है कि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आएं और विवादों का समाधान निकालें। फिलहाल यह मान्यता फिलिस्तीन को कूटनीतिक ताकत देती है और उसकी स्थिति को मजबूत बनाती है। (इनपुट : एएनआई)

इजराइल का जवाब : Israel reaction to Palestine recognition

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की ओर से फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया( Israel Palestine conflict) दी है। स्काई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस कदम को यूरोप की राजनीतिक जरूरतों से प्रेरित बताया और कहा कि इज़राइल ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जो उसकी खुद की सुरक्षा और अस्तित्व के लिए खतरा बने। नेतन्याहू (Netanyahu response Palestine) ने इसे ‘आत्महत्या’ की तरह बताया है। इज़राइल के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता शोश बद्रोसियन (Shosh Badrosian) ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि नेतन्याहू (Netanyahu) ने साफ कर दिया है कि उनका संदेश उन देशों के लिए है जो गाजा में हमास की ओर से फैलाई गई अराजकता को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इज़राइल में उनके सैनिक, उनके परिवार और हमास की कैद में मौजूद बंधक लोग हैं। इसलिए, ऐसे देश जो सिर्फ राजनीतिक कारणों से फिलिस्तीन को मान्यता (UK Palestine recognition) दे रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि इज़राइल अपनी सुरक्षा के लिए कोई समझौता नहीं करेगा।

ब्रिटेन : कीर स्टारमर की भूमिका
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार ने फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की योजना बनाई है। इस फैसले को नेतन्याहू ने निंदनीय और आतंकवाद को प्रोत्साहित करने वाला बताया। ब्रिटेन ने इस कदम को दो-राज्य समाधान के लिए एक जरूरी कदम माना है, जिससे मध्य पूर्व में शांति स्थापित हो सके। हालांकि, नेतन्याहू का मानना है कि यह कदम इज़राइल के हितों के खिलाफ है।

कनाडा और ऑस्ट्रेलिया का साथ
ब्रिटेन के साथ-साथ कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने भी एक साथ मिलकर फिलिस्तीन को मान्यता दी है। इन देशों ने फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता के साथ-साथ हमास को अपनी गतिविधियां बंद करने की भी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब तक हमास अपना अस्तित्व समाप्त नहीं करता, तब तक स्थिर शांति संभव नहीं है। ये तीनों देश फिलिस्तीन के लिए द्वि-राज्य समाधान की बात करते हुए शांति का रास्ता चाहते हैं।

फिलिस्तीनी सरकार की प्रतिक्रिया
फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इन देशों के फैसले का स्वागत किया है। मंत्रालय ने इसे शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि यह मान्यता द्वि-राज्य समाधान के लिए समर्थन का प्रतीक है। साथ ही, उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन सरकार इन देशों के साथ अच्छे संबंध बनाने की पूरी कोशिश करेगी ताकि क्षेत्र में स्थिरता आ सके।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू की भूमिका
नेतन्याहू आगामी सप्ताह में न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेंगे। वहां कुछ देश फिलिस्तीन को मान्यता देने की घोषणा करेंगे और अपने-अपने पक्ष रखेंगे। नेतन्याहू वहां अपनी बात रखेंगे और इज़राइल की सुरक्षा चिंताओं को सामने लाएंगे। यह महासभा इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक जटिल बना सकती है।

यह बड़ा राजनीतिक कदम
बहरहाल मध्य-पूर्व की जटिल राजनीति में फिलिस्तीन को मान्यता देने का फैसला एक बड़ा राजनीतिक कदम है। यह शांति प्रक्रिया को बढ़ावा देने की कोशिश है, लेकिन इज़राइल की सुरक्षा चिंताएं और राजनीतिक विरोध इसे एक चुनौतीपूर्ण मुद्दा बना रहे हैं। नेतन्याहू का कहना है कि वे यूरोपीय देशों की राजनीतिक आवश्यकताओं के कारण अपनी सुरक्षा को खतरे में नहीं डालेंगे। ( इनपुट: एएनआई.)

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