March 8, 2026

Khamenei Killing Plan: खामेनेई के कत्ल का प्लान ? इज़राइल की मोसाद ने कैसे बनाया

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israel Mosad plan for khamene Elimating
  • पढ़िए सनसनीखेज खुलासा, कैसे कैमरे बने मोसाद के ‘जासूस’

Israel : ईरान और इज़राइल (Israel) के बीच जंग के चलते सामने आई एक ताज़ा रिपोर्ट से खुफिया ऑपरेशंस की दुनिया में तहलका मच गया है। द टाइम्स ऑफ़ इज़राइल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इज़राइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने अपनी सुरक्षा तकनीक को एक कदम आगे ले जाते हुए ईरान ( Iran) की राजधानी तेहरान के ही ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को हैक कर लिया था।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये वही कैमरे थे जिन्हें ईरान अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और अन्य शीर्ष अधिकारियों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करता था। रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि ईरान सरकार इन कैमरों का प्रदर्शनकारियों पर नज़र रखने और अपने विरोधियों को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल करती थी। लेकिन, मोसाद ने इस निगरानी प्रणाली को ईरान के ही खिलाफ इस्तेमाल करने का अचूक तरीका खोज निकाला।

खुलासे के मुताबिक​ इज़राइल को इन कैमरों का एक्सेस बरसों पहले ही मिल गया था। इस दौरान मोसाद (Mossad) को एक ऐसे विशेष कैमरे के बारे में जानकारी मिली, (Hacking) जिसका एंगल कुछ इस तरह था कि उससे खामेनेई की सुरक्षा में लगे जवानों की पार्किंग साफ दिखाई देती थी। इसी एक कैमरे ने इज़राइली इंटेलिजेंस(Intelligence) को बहुत बड़ा फायदा मिला और खामेनेई के कत्ल की साजिश रचने में आसानी हुई। इस तरह इज़राइल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर युद्ध और खुफिया ऑपरेशन में वह दुनिया की सबसे एडवांस ताकतों में से एक है।

जानकारी : इज़राइल को क्या मिली ?
रिपोर्ट के अनुसार इन कैमरों के ज़रिए मोसाद ने न केवल बॉडीगार्ड्स की पहचान की, बल्कि उनकी पूरी दिनचर्या की फाइल तैयार कर ली। इज़राइली खुफिया एजेंसियों को पता चल गया कि:

उनके काम का ​शि्ड्यूल क्या है।

किस गार्ड को किसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी दी गई है।

गार्ड्स के पते और उनके रहने के ठिकाने क्या हैं।

अहम रोल: AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का 
एक ब्रिटिश अखबार के अनुसार,इज़राइल के पास ईरान के नेताओं की गतिविधियों का भारी-भरकम डेटा जमा हो गया था। इस विशाल डेटा को समझने और काम की जानकारी निकालने के लिए इज़राइल ने एडवांस AI टूल्स और एल्गोरिदम का सहारा लिया। इसी तकनीक ने मोसाद को खामेनेई की लोकेशन के बारे में सटीक जानकारी और पैटर्न समझने में मदद की।

ब्लॉक किए: सेल्युलर सर्विस ठप, सिग्नल  
रिपोर्ट में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि जिस इलाके (तेहरान की पाश्चर स्ट्रीट) में खामेनेई पर हमला हुआ था, वहां इज़राइल और अमेरिका ने मिल कर सेल्युलर सर्विस को पूरी तरह हैक कर दिया था। इसका सीधा मतलब यह था कि अगर कोई बॉडीगार्ड या सुरक्षाकर्मी किसी खतरे की चेतावनी देना भी चाहता, तो उनके फोन पर केवल बिजी सिग्नल ही सुनाई देता।

ह्यूमन इंटेलिजेंस और CIA का भी रहा हाथ
रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी तकनीकी और हैकिंग गतिविधियों के अलावा, खुफिया सूचनाओं की पुष्टि के लिए अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA का भी सहयोग मिला। बताया जाता है कि CIA के पास ज़मीनी स्तर पर एक ‘ह्यूमन सोर्स’ (जासूस) भी था, जिसने मीटिंग्स और अधिकारियों के आने-जाने की पुख्ता जानकारी दी, जिससे मोसाद को अपना ऑपरेशन अंजाम देने में मदद मिली। इस सनसनीखेज़ खुलासे से ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिन कैमरों पर देश की आंतरिक सुरक्षा टिकी थी, उनका ही मोसाद की ओर से इस्तेमाल किया जाना ईरान की खुफिया नाकामी दर्शाता है।

 

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