March 8, 2026

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर? सुप्रीम लीडर खामेनेई का बड़ा दांव, लारिजानी को सौंपी अहम जिम्मेदारी

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नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित टकराव की आशंकाओं के बीच ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक अधिकार अपने भरोसेमंद सहयोगी अली लारीजानी को सौंप दिए हैं। इस कदम को संभावित युद्ध परिस्थिति में कमान को केंद्रीकृत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

लारिजानी के हाथ में सैन्य और कूटनीतिक कमान

रिपोर्ट के अनुसार लारिजानी अब सुरक्षा सैन्य संचालन और कूटनीतिक पहलुओं से जुड़े अहम फैसले लेने की स्थिति में हैं। वे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख पद पर रहते हुए परमाणु वार्ताओं क्षेत्रीय सहयोगियों से समन्वय और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि संभावित संघर्ष की स्थिति में तेज और एकीकृत निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह बदलाव किया गया है।

राष्ट्रपति की भूमिका सीमित उत्तराधिकार की तैयारी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की भूमिका इस बदलाव के बाद अपेक्षाकृत सीमित बताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व ने आकस्मिक परिस्थितियों यहां तक कि नेतृत्व स्तर पर किसी अप्रत्याशित घटना को ध्यान में रखते हुए उत्तराधिकार की बहुस्तरीय व्यवस्था पर काम शुरू किया है। सेना को हाई अलर्ट पर रखने मिसाइल सिस्टम की रणनीतिक तैनाती और आंतरिक सुरक्षा बलों को तैयार रखने की खबरें भी सामने आई हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी गतिविधियां
रणनीतिक दृष्टि से अहम  क्षेत्र में ईरान की सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। मिसाइल परीक्षण और नौसैनिक अभ्यासों की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह जलमार्ग विश्व के बड़े हिस्से के तेल निर्यात का प्रमुख रास्ता है इसलिए यहां की हलचल का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

क्षेत्रीय समीकरण और वैश्विक नजर

मध्य पूर्व पहले से ही संवेदनशील भू-राजनीतिक समीकरणों का केंद्र रहा है। ऐसे में तेहरान का यह कदम संकेत देता है कि ईरान संभावित टकराव की आशंका को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर व्यापक युद्ध की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन सैन्य और सुरक्षा ढांचे में यह पुनर्संरचना बताती है कि देश किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की रणनीति अपना रहा है।

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