ट्रम्प का दांव, दो धारी तलवार: ट्रम्प के ओछेपन और अल्पज्ञान के बीच हमको अपनी जागरुकता बनाए रखना जरूरी
-
-
देश हमारा, निर्णय हमारा: अमेरिका की कही सुनी बात से नहीं हम खुद सोच, समझ व देख कर तथ्यों पर लेंगे निर्णय, कि सच क्या और झूठ क्या?

AI photo
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी पर पिछले दिनों दिए गए राष्ट्रपति ट्रम्प के बयान पर उनकी आत्म मुग्धता का एक नया ही स्तर देखा गया। ट्रम्प का कहना है की मोदीजी जानते हैं की ट्रम्प नाराज़ हैं और वे उसे ख़ुश करने के लिए रूस से कच्चा तेल ख़रीदना कम कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने भारत को अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने की धमकी भी दी।
कुल मिलाकर देखा जाए तो ट्रम्प कोई बेवकूफी नहीं बल्कि बड़े ही शातिर अंदाज में चाल चल रहे हैं। दरअसल ट्रम्प भी ये जानते हैं कि मोदी झुकेंगे नहीं, ऐसे में उन्हें घर में ही घेरना अच्छा विकल्प हो सकता है। सही भी है कई लोगों का मानना है कि देश के कुछ विशेष चम्मे व उनके आका इसे मुद्दा बनाएंगे ही और जनता को भी गुमराह करेंगे।
शायद ट्रम्प ये समझते हैं कि भारत का वह संगठन जो चंद करोड़ में अपने सबसे प्रमुख दुश्मन से दोस्ती व उसके सामने झुकने को तैयार हो गया था, वह इस बार पिछली बार की अपेक्षा थोड़ा ताकतवर है (जिसे देश को आर्थिक मजबूत बनाने या किसी भी स्तर पर शक्तिशाली बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है, यह केवल अपने लिए सत्ता और पैसे का भूखा है)। तो उसे चीन से कुछ ज्यादा करोड़ हम देकर अपनी ओर मोड़ सकते हैं, जिससे मोदी घर की ही परेशानियों में उलझ जाएंगे। और यह पैसा पाने वाले किसी तरह से वापस सत्ता में आकर हमारे गुलाम का व्यवहार करेंगे।
ट्रम्प ने जिस नीति के तहत ये चाल चली (कि देश के लोगों में झूठ प्रसारित किया जाए) वह काफी हद तक सफल भी होती दिख रही है। इसका जीता जागता उदाहरण भी सामने आ रहा है।
ट्रम्प के द्वारा चली गई ये चाल काफी प्रभावी होती दिख रही है, वो जानता था भारत का विपक्ष गलती करेगा। और हुआ भी वहीं विपक्ष बिना कुछ सोचे समझे केवल आरोपों पर उतर आया है, यह वहीं स्थिति है जो शायद ट्रम्प चाहते थे।
'मोदी मुझे खुश करना चाहता है। वो जानता है कि मैं उससे खुश नहीं हूं और मुझे खुश करना जरूरी है।' pic.twitter.com/ILJ1Wuht07
— Congress (@INCIndia) January 5, 2026
जहां तक ट्रम्प का यह वक्तव्य की बात है तो यह ना केवल कूटनीतिक स्तर पर ट्रम्प का ओछापन दिखाता है, साथ ही यह भारत की विदेश नीति एवं मोदीजी के चरित्र के बारे में भी ट्रम्प के अल्पज्ञान को परिलक्षित करता है। वास्तव में अमेरिकी राष्ट्रपति का यह व्यवहार ठेठ ‘छोड़े गए पूर्व प्रेमी’ की तरह होता जा रहा है। ट्रम्प का यह अपरिपक्व व्यवहार दीर्घकाल में भारत और अमेरिका के संबंधों को गंभीर नुक़सान पहुँचा सकता है। वह स्थिति शायद वैश्विक कूटनीति के लिए अपूरणीय क्षति होगी।
मोदी एक कमजोर प्रधानमंत्री हैं pic.twitter.com/s86rT9rJuF
— Congress (@INCIndia) January 5, 2026
कुल मिलाकर देश की जनता को ही इस पर सोचना होगा कि क्या कभी हमारे देश के वर्तमान प्रधानमंत्री किसी के समाने झुके या दुनिया की चाहे कोई सबसे बड़ी ताकत ही क्यों न हो उसके न कहने पर भी देश की जनता के भले से पीछे हटे। यहां ये भी जान लें कि यदि झुकना ही होता तो टेरिफ से पहले ही जब अमेरिका रुस से तेल लेने को मना कर रहा था। उस समय भी भारत डर से उसे बंद कर देता। क्या जनता ये मानती है कि मोदी पर चीन में कथित हमले की आशंका / कोशिश के बाद भी (जिसकी जिम्मेदारी के लिए लोग दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पर भी संदेह करते हैं) मोदी अमेरिका के समाने झुकेंगे या देश की सम्रद्धि के लिए कार्य करेंगे।
मोदी ने पहले भी दिखाई थी अपनी हिम्मत
याद हो कि भारत पर ट्रम्प द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की किसी शर्त के आगे नहीं झुके, बल्कि इसका उन्होंने नया विकल्प तलाशना शुरू कर दिया। अमेरिका के खिलाफ पीएम मोदी की सूझबूझ, उनकी नई कूटनीति और रणनीति ने जब भारत और चीन जैसे कट्टर प्रतिद्वंदियों को बेहद करीब ला दिया और रूस इस तिकड़ी को फिर से मजबूत करता दिखा तो अमेरिका में खलबली मच गई।
उस समय हालत ये हो गए थे कि ट्रम्प के विरोधी ही नहीं, बल्कि उनके अपने भी भारत के खिलाफ अमेरिका की नीति और रणनीति की आलोचना करने लगे। इससे ट्रम्प दबाव में आ गए। ऐसे में इस बात की चर्चा तेज हो गई कि पीएम मोदी ने अमेरिका के दबाव को दरकिनार कर उन्होंने अपने “मैं देश नहीं झुकने दूंगा” वाला बयान सच साबित कर दिखाया है। क्योंकि अपने ही देश में आलोचनाओं से घिरने और यूरेशिया में भारत जैसा साथी खोने का जब राष्ट्रपति ट्रम्प को एहसास होना शुरू हुआ तो उन्हें लगा कि वह भारत से रिश्ते खराब कर बड़ी गलती कर रहे हैं। इसके बाद ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल पर भारत और पीएम मोदी को लेकर एक सकारात्मक बयान जारी किया था।
पहले क्या क्या लिखा था ट्रम्प ने
: ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा था, ‘‘लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका (भारत-रूस का) भविष्य दीर्घकालिक और समृद्ध हो!” ट्रम्प की इस टिप्पणी को विशेषज्ञ उनके अड़ियल रुख में बदलाव के रूप में देख रहे हैं।: एक और बयान में ट्रम्प ने वाशिंगटन में कहा था, “मैं हमेशा (नरेन्द्र) मोदी का मित्र रहूंगा, वह एक महान प्रधानमंत्री हैं। भारत और अमेरिका के बीच विशेष संबंध हैं। चिंता की कोई बात नहीं है। बस कभी-कभी कुछ ऐसे पल आ जाते हैं।
अपने पुराने दांव फेल होने के बाद ट्रम्प की ओर से ये दोधारी तलवार की तरह से नया दांव चला गया, जिसमें उन्होंने कहा कि मोदीजी जानते हैं की ट्रम्प नाराज़ हैं और वे उसे ख़ुश करने के लिए…, खास बात ये भी है कि अंदर खाने इस बात में कितनी सच्चाई है ये बात सब जानते हैं लेकिन इसके बावजूद ट्रम्प के इस दांव को देश में सफल बनाने की कोशिश जारी है।
ऐसे में ट्रम्प के इस बयान के बाद विपक्षी दल केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं…
कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, “ट्रंप ने कहा- ‘नरेंद्र मोदी ने मुझे ख़ुश करने के लिए रूस से तेल ख़रीदना बंद कर दिया’ ये भारत का अपमान है. नरेंद्र मोदी को इसका जवाब देना चाहिए, देश को सच्चाई बतानी चाहिए.”
अमेरिका के सामने भारत का स्वाभिमान गिरवी रख चुके हैं प्रधानमंत्री मोदी।
तभी डोनाल्ड ट्रंप हर दिन भारत को अपमानित करते हैं और इसके ख़िलाफ़ मोदी एक शब्द तक नहीं बोलते हैं। pic.twitter.com/JftehslGIg
— AAP (@AamAadmiParty) January 6, 2026
आम आदमी पार्टी ने एक्स पर लिखा, “मोदी जी आपकी चुप्पी देश की इज़्ज़त पर भारी पड़ रही है. आख़िर ऐसा क्या है, जिसके लिए आप ट्रंप को ख़ुश करना चाहते हैं.”
राष्ट्रपति ट्रम्प ठीक कह रहे थे – उसको ख़ुश करने के लिए भारत ने रूस से तेल का आयात कम कर दिया है
कल से भाजपाई चला रहे थे – “हम ट्रम्प से नहीं डरते , भारत रूस से अब और ज़्यादा तेल आयात कर रहा है”
ये ख़बर अमेरिका सरकार और ट्रम्प तक पहुँच गई होगी , इसलिए रिलायंस ने सच बता दिया ।… https://t.co/oW7aW3h6OK
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) January 6, 2026
सवाल: जो सोचने को मजबूर करते हैं…
1. ट्रम्प ने ऐसा क्यों कहा?
: जानकार मानते हैं ट्रम्प ने मोदी को दबाव में लाने वाले उन्हें घर में ही घेरने की साजिश के तहत ये दांव खेला है।2. क्या ट्रम्प मानसिक संतुलन खो गए हैं, और कुछ भी उलूलजूलूल बोल रहे हैं?
: ट्रम्प भारत की ‘डेड इकोनॉमी’ बता चुके हैं। जबकि भारत की इकोनॉमी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही है।
: रूस-भारत के संबंध: इतिहास, सामरिक साझेदारी और अमेरिका में बेचैनी है, ट्रम्प का इसको बेहद दर्द है।कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीसकी विश्लेषक एलिसा आयर्स ने कहा था कि: “ट्रम्प की समस्या सिर्फ रूस नहीं है, उनकी समस्या यह है कि भारत ने अमेरिका को प्राथमिकता नहीं दी। यह बयान भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता पर हमला है।”
3: पाकिस्तान कार्ड: कूटनीति या आत्मघाती दांव?
ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने “भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोका”, भारत की विदेश नीति के मूलभूत सिद्धांतों को चुनौती दे गया। भारत हमेशा से तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज करता रहा है।4. ये एक षडयंत्र है?
: जानकार मानते हैं कि ये ट्रम्प का वो दांव है जिसमें या तो मोदी के विरोध में देश की जनता आए और विपक्ष भी उन्हें किसी तरह फंसाए ताकि देश की आर्थिक तरक्की का पहिया रुक जाए या मोदी उसके सामने झुक जाएं।5. क्या अमेरिका भारत के संबंध बिगाड़ने के साथ ही ट्रम्प भारत की आर्थिक ग्रोथ को कमजोर करना चाहते हैं।
: जानकार मानते हैं कि भारत की आर्थिक ग्रोथ कम होने पर दुनिया में उसका प्रभाव कम करने व जो देश उसके साथ हैं उन्हें उससे दूर करने के लिए भी ट्रम्प की ओर से मोदी को किसी भी तरह फंसा कर देश की आर्थिक तरक्की को कम करने व उनके सामने झुकाने के लिए व भारत को बराबरी पर खड़ा होकर काम करने से रोकने के लिए ये खास तरह का प्लान चुना गया है।सवाल: यदि मोदी ट्रंप से डरते हैं और उसे खुश करना चाहते हैं तो उसका फोन क्यों नहीं उठाया।
ज्ञात हो अगस्त 2025 में यह बात बड़ी चर्चा में रही कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करना चाहते हैं, लेकिन मोदी फोन नहीं उठा रहे। सप्ताह में ट्रंप ने चार बार बात करने की कोशिश की, लेकिन पीएम मोदी से इनकार कर दिया। यह दावा जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर अल्गेमाइन (FAZ) ने किया था। डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुई लड़ाई रुकवाने के दावे पर FAZ ने दावा किया कि मोदी झूठे ट्रंप का फोन रिसीव नहीं कर रहे।इसके अलावा कनाडा में आयोजित G7 समिट के दौरान ट्रंप और मोदी की मुलाकात तय थी। लेकिन, ट्रंप अचानक समिट छोड़कर अमेरिका लौट गए, ऐसे में यदि मोदी ट्रम्प से डरते तो क्या ट्रम्प के वॉशिंगटन आने के न्यौते को वे ठुकरा (जो उन्होंने ठुकराया) सकते थे, जबकि उस समय वह कनाडा में जी—7 समिट ही के देश में थे।
अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने की धमकी को ऐसे समझें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में गुजरात के अहमदाबाद में जनसभा को संबोधित करने के दौरान अमेरिकी टेरिफ को लेकर कहा था कि, ‘दबाव कितना ही क्यों न आए हम झेलने की अपनी ताकत बढ़ाते जाएंगे’।#WATCH | Ahmedabad, Gujarat: Prime Minister Narendra Modi says, "Today in the world, everyone is busy doing politics based on economic interests. From this land of Ahmedabad, I will tell my small entrepreneurs, my small shopkeeper brothers and sisters, my farmer brothers and… pic.twitter.com/aYGcdyiEPs
— ANI (@ANI) August 25, 2025
यहां उन्होंने कहा, “दुनिया में आर्थिक स्वार्थ वाली राजनीति, सब कोई अपना करने में लगा है। उसे हम भली भांति देख रहे हैं। मैं अहमदाबाद की इस धरती से अपने लघु उद्यमियों से कहूंगा, मेरे छोटे-छोटे दुकानदारों भाई-बहनों से कहूंगा। किसान, पशु पालक भाई-बहनों से कहूंगा। मैं गांधी की धरती से बोल रहा हूं। मेरे देश के लघु उद्यमी, किसान, पशु पालक, हर किसी के लिए मैं आपसे वार-वार वादा करता हूं, मोदी के लिए आपके हित सर्वोपरि हैं।”
रिश्तों में खटास के ये भी हैं कारण…
1. सीजफायर का श्रेय: ट्रम्प ने दावा किया था कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का श्रेय उन्हीं को जाता है। जो नकार दिया गया।2. नोबेल पुरस्कार: ट्रंप ने मोदी से कहा कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने वाला है और भारत को भी ऐसा करना चाहिए। भारत ने ऐसा नहीं किया।
3. कश्मीर पर मध्यस्थता से इनकार: मोदी ने कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार करने से इनकार कर दिया। जब ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की थी।
4. अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ में कटौती नहीं: भारत ने अमेरिकी फार्मिंग और डेयरी उत्पादों के लिए बाजार खोलने के अमेरिकी दबाव को खारिज कर दिया और घरेलू किसानों के हितों को प्राथमिकता दी।
दरअसल ऐसे तमाम स्थितियों से बौखलाए ट्रंप का यह वक्तव्य दो धारी तलवार की तरह है, जिसे लेकर उसे यह लगता है कि या तो भारत की जनता का मोदी से विश्वास घटेगा + विपक्ष तो इसे देश भर में फैलाएगा ही या मोदी ट्रंप के सामने झूकने को मजबूर होंगे।
मोदी के शांत रहने का कारण क्या है: यहां ये भी जान लें मोदी कभी भी त्वरित यानी जल्दबाजी में कुछ नहीं कहते या करते, वे अपनी सनातनी परंपरा से समय अनुसार हर किसी को जवाब देते हैं। और वो भी ऐसा की वह हमेशा याद रखें।

अब निर्णय देश के हाथ में है कि हमारा देश ट्रम्प की चाल में फंस उसके सामने झुकेगा या उसे ही मुंह तोड़ जवाब पूरी जनता के सहयोग से देगा।
वहीं अमेरिकी सिंगर और भारत की प्रशंसक मानी जाने वाली मैरी मिलबेन ने यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणी पर रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे मित्र देश के साथ अनावश्यक तनाव से बचना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी जमकर तारीफ की है। उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि पीएम मोदी आगे बढ़ते रहें और भारत के सर्वोत्तम हित में सेवा करना जारी रखें। मैरी मिलबेन ने इससे पहले राहुल गांधी की आलोचना करके चर्चा में आ चुकी हैं। अब उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि यूएस राष्ट्रपति ट्रंप की हर धमकी का जवाब देने की जरूरत नहीं है।
I know @POTUS in his heart respects the PM, but sadly @POTUS is being ill-advised on his approach to India. I am praying for the President on this.
Countering the remarks by the opposition in India, PM @narendramodi doesn’t need to respond to every comment or threat @POTUS… pic.twitter.com/bqSfWagFej
— Mary Millben (@MaryMillben) January 5, 2026
-
