March 8, 2026

यूरोप में नए शक्ति संतुलन का उदय: फ्रांस से बढ़ी दूरी, इटली बना जर्मनी का नया 'पावर पार्टनर'

0
2421-1769257719

नई दिल्ली।द्वितीय विश्व युद्ध की राख से उबरकर जिस फ्रांस-जर्मनी की जोड़ी ने आधुनिक यूरोप की नींव रखी थी, आज वही ऐतिहासिक धुरी डगमगाती नजर आ रही है। बर्लिन और पेरिस के बीच बढ़ते कूटनीतिक गतिरोध ने यूरोपीय संघ (EU) के भीतर एक बड़े सत्ता परिवर्तन के संकेत दे दिए हैं। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच बढ़ती तल्खी ने अब जर्मनी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की ओर झुकने पर मजबूर कर दिया है। दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान चांसलर मर्ज के बयानों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अब यूरोप का संचालन पुराने ढर्रे पर नहीं बल्कि नए और अलग तरीके से होगा।

इस दरार की सबसे बड़ी वजह आर्थिक और रक्षा रणनीतियों में विरोधाभास है। जर्मनी की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ प्रस्तावित ‘मर्कोसुर’ व्यापार समझौता संजीवनी की तरह है। इसके विपरीत राष्ट्रपति मैक्रों अपने देश के नाराज किसानों को शांत करने के लिए इस डील का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। फ्रांस को डर है कि सस्ते लैटिन अमेरिकी कृषि उत्पाद उसके घरेलू बाजार को बर्बाद कर देंगे। यह आर्थिक टकराव केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। रक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े प्रोजेक्ट फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम FCAS को लेकर भी दोनों देश आमने-सामने हैं। फ्रांस जहां इस 100 अरब यूरो के फाइटर जेट प्रोजेक्ट पर अपना एकाधिकार और तकनीकी नियंत्रण चाहता है वहीं जर्मनी बराबरी की हिस्सेदारी और अपनी कंपनी एयरबस के लिए समान अधिकारों पर अड़ा है।

इन्हीं मतभेदों के बीच इटली एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। मेलोनी और मर्ज के बीच न केवल वैचारिक तालमेल दिख रहा है बल्कि अमेरिका के प्रति उनके व्यवहारिक नजरिए ने भी उन्हें करीब लाया है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ संबंधों को लेकर जहां फ्रांस आक्रामक रुख अपना सकता है वहीं जर्मनी और इटली मिलकर एक बैलेंस बनाने की कोशिश में हैं। 23 जनवरी को रोम में होने वाली इटली-जर्मनी शिखर बैठक इस नए गठजोड़ की आधिकारिक मुहर बन सकती है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि फ्रांस-जर्मनी के रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं होंगे लेकिन यूरोप के नेतृत्व का वह दौर अब बीत चुका है जहां सिर्फ पेरिस और बर्लिन की मर्जी चलती थी। अब यूरोप की राजनीति की नई पटकथा रोम के रास्तों से होकर गुजरेगी।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *